समस्तीपुर : हर सुबह समस्तीपुर की सड़कों पर सूरज से पहले शोर उतर आता है-प्रेशर हॉर्न की चीख, धुएं की मोटी परत और धूल का अंधड़। मगरदही घाट से मुक्तापुर गुमटी तक सांस लेना तकलीफ बन गया है। बच्चे खांसी में उलझे हैं, बुजुर्गों की सुनने की शक्ति जाती रही और घर साउंडप्रूफ खिड़कियों में कैद हो गए हैं। हर कोने में एक अजीब-सी थकान है-जिसे न कोई सुन रहा, न समझ रहा। शिकायतें थक चुकी हैं, लोग हार मानने को मजबूर हैं। क्या कोई सुनेगा इन सड़कों की घुटती आवाज़ें? या फिर समस्तीपुर की ये हवा हमेशा जहर बनी रहेगी? यह बातें SAMASTIPUR TOWN द्वारा शहरवासियों से संवाद के दौरान उभर कर सामने आईं।
समस्तीपुर की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियां नहीं दौड़तीं है, बल्कि दौड़ती है एक ऐसी व्यवस्था जो लोगों की सांसों को धीरे-धीरे निगल रही है। मुसरीघरारी चौराहा, मगरदही घाट, मथुरापुर घाट, मुक्तापुर गुमटी, ताजपुर रोड, स्टेशन रोड में हर रोज हजारों लोग ध्वनि और वायु प्रदूषण की भयावह गिरफ्त में हैं। दिनभर प्रेशर हॉर्न की कानफोड़ू आवाज़ और भारी वाहनों से निकलने वाले काले धुएं ने आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है। मानो सड़क किनारे रहना अब एक सजा बन चुकी है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई या तो बीमार है या बीमारी की दहलीज पर खड़ा है।
स्थानीय प्रेम सिंह, सुमीत कुमार, अमर कुमार अमित कुमार आदि कहते हैं कि हमारे बच्चे खांसी और सीने की जकड़न से रात-रातभर सो नहीं पाते। डॉक्टर के पास जाना अब रूटीन हो गया है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों है। कई बुजुर्गों की सुनने की क्षमता कम हो चुकी है। तेज प्रेशर हॉर्न से न सिर्फ सड़क दुर्घटनाएं बढ़ीं हैं, बल्कि लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है। मोहल्लों में ट्रैक्टरों के निकलने से धूल उड़ती है, लोग दिनभर मास्क लगाए रहते हैं।
राजीव कुमार चौधरी, भगवान सिंह नीरज पासवान आदि बताते हैं कि यात्री बसें और ऑटो सड़कों के बीचों-बीच सवारियां चढ़ाते-उतारते हैं, जिससे हर समय जाम लगा रहता है। बस स्टैंड खाली पड़ा है और सड़कें पार्किंग स्थल बन गई हैं। डीएम आवास के पास तो इस तरह ऑटो सड़क पर रहती है की आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है। सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, लेकिन एक भी नया पौधा नहीं लगाया गया। भगवान सिंह.मो. अमन गुरू चरण साह आदि कहते हैं कि अब न छांव रही, न हवा। हर दिन सूरज की तपिश और धुएं की चुभन शरीर को बींधती है। लोग बताते हैं कि शिकायतें दर्ज कराते-कराते अब तो हिम्मत भी जवाब दे चुकी है।
लोगों ने बताया कि हमने अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन जवाब नहीं मिला। अब तो लोग साउंडप्रूफ कांच की खिड़कियां लगवा रहे हैं, ताकि घर के अंदर ही थोड़ी शांति मिल सके। लोगों ने मांग की है कि सड़कों और नालों की खुदाई के बाद तय समय में मरम्मत हो। ध्वनि और वायु प्रदूषण रोकने के लिए ठोस नियम लागू हों और उनकी सख्ती से निगरानी भी हो। समस्तीपुर की सड़कों पर शोर, धूल और धुएं के बीच रोज़मर्रा की जिंदगी सांस लेने को तरस रही है। इनकी भी सुनिए प्रेशर हॉर्न और जहरीले धुएं ने शहर की सांसों को कैद कर लिया है। हम सड़क के किनारे रहने वालों के लिए खिड़की खोलना भी मुश्किल हो गया है।
अरविंद कुमार, विश्वनाथ पासवान, अमर कुमार आदि ने बताया कि मगरदही घाट, मथुरापुर घाट व ताजपुर रोड सबसे व्यस्त सड़क में से एक है। बड़े वाहनों में प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती है। कई दफा प्रेशर हॉर्न की वजह से राहगीर दुर्घटना का शिकार हो गये हैं। सड़क पर गिरकर जख्मी हुए हैं। इसके अतिरिक्त मोहल्ले से बालू व मिट्टी लदा ट्रैक्टर निकलता है। इसके कारण दुर्घटना के साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है।
मोहल्लों के लोगों के कई लोगों में सुनने की क्षमता कम होती जा रही है। प्रेशर हॉर्न, धूल और धुएं के दुष्प्रभाव के कारण तकरीबन हर घर में बीमारियों से पीड़ित मिल जाएंगे। लोगों ने बताया कि वह लोग शिकायत करते-करते थक चुके हैं। अब तो अधिकारियों से शिकायत करने का दिल भी नहीं करता है। अपने आप को इसे झेलने के लिए तैयार रखने की कोशिश करनी पड़ती है। घरों में साउंड प्रूफ कांच की खिड़की लगा रहे हैं, ताकि वाहनों के प्रेशर हॉर्न और उनके प्रदूषण को रोका जा सके।
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