Samastipur

प्राथमिक उप-स्वास्थ्य केंद्र पर ग्रामीणों ने कर रखा है अतिक्रमण, पहुंच पथ नहीं होने से लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का नहीं मिल पा रहा है लाभ

समस्तीपुर : बिहार में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध कराने को लेकर सरकार भले ही लाख दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। समस्तीपुर जिले के बिथान प्रखंड से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जो स्वस्थ्य व्यवस्था की कलाई खोलने के लिए काफी है।

जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर बिथान प्रखंड के सखवा पंचायत स्थित प्राथमिक उपस्वास्थ्य केंद्र की यह तस्वीर है। इस उपस्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नही है। स्वास्थ्य केंद्र के भवन को स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है। ग्रामीण भवन का उपयोग जलावन और मवेशी का चारा रखने के लिए करते है। उपस्वाथ्य केंद्र तबेले में तब्दील हो चुका है। आस पास के लोग अपने पशु को बांध कर रखते है। जिस कारण लगभग दस हजार की आबादी उपस्वास्थ्य केंद्र का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इस उपस्वास्थ्य केंद्र में तीन महिला स्वास्थ्य कर्मी कार्यरत है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मी उपस्वास्थ्य केंद्र की बजाय सामुदायिक भवन पर इलाज के नाम पर खानापूर्ति करते है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस उपस्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नही है। अस्पताल में पदस्थापित कर्मी कभी सामुदायिक भवन तो कभी किसी ग्रामीण के दरवाजे पर बैठ कर इलाज करते है। गांव के लोग निजी अस्पताल या हसनपुर और बिथान प्रखंड स्थित सरकारी अस्पताल का रुख करना पड़ता है।

वहीं पंचायत समिति सदस्य मधु कुमारी का कहना है की उप स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच पथ नहीं होने के कारण लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नही मिल पा रहा है। यहां तैनात कर्मी दर-दर भटक रहे हैं। उपस्वास्थ्य केंद्र की पुरानी भवन जर्जर हो चुकी थी। जिसके बाद नए भवन का निर्माण कराया गया, लेकिन उस अस्पताल तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नही है। इस संबंध में कई बार जनप्रतिनिधि से लेकर अधिकारियों तक शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नही हुई है।

वहीं सिविल सर्जन डॉ एसके चौधरी का बताना है कि पंचायत में पहले एचएससी था जिसका भवन जर्जर हो चुका था। जिसको तोड़कर एचडब्ल्यूसी का निर्माण कराया गया है। लेकिन अब तक नया भवन उन्हें हस्तांतरित नही कराया गया है। अस्पताल तक पहुंचने के लिए पहुँच पथ नही है। इसको लेकर स्थानीय प्रशासन से अनुरोध कर जल्द उसे संचालित किया जाएगा।

लेकिन बड़ा सवाल है कि लाखों रुपये खर्च कर भवन का निर्माण करने के पहले पहुंच पथ का ध्यान क्यों नही रखा गया। भवन बने वर्षों बीतने के बाबजूद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पहल क्यों नहीं की गई।

Avinash Roy

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