शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने को लेकर सरकार ने खजाना खोल दिया है। सरकारी स्कूलों में संसाधन बढ़ाने को लेकर अरबों रूपये भेजे गए। बेंच-डेस्क से लेकर बिल्डिंग की मरम्मति व अन्य कार्यों के लिए जो राशि भेजी गई, वह बिहार के कई जिलों में बैठे अधिकारी ठेकेदारों से मिल कर अपना पेट भरने में लगे।
भ्रष्टाचार के इस खेल में शामिल शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर दिखावे के लिए कार्रवाई भी हुई, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। लिहाजा अधिकांश जिलों में सरकारी राशि का बंदरबांट कर लिया गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर कमीशन खाकर पेट भर लिया। कहा जाता है कि हाल के 1-2 वर्षों में एक-एक अधिकारियों ने इतनी कमाई की, जितना कई वर्षों में नहीं किया होगा। बेतिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी रजनीकांत प्रवीण का उदाहरण दिया जा रहा है।
बता दें, हाल के वर्षों में शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में ‘साईंस लैब’ में सामाग्री की उपलब्धता को लेकर बड़ी राशि भेजी थी। विभाग के जानकार बताते हैं कि इस राशि का 50 फीसदी से अधिक का बंदरबांट हो गया। यानि अधिकारी से लेकर सप्लायर ने मिल बांटकर खाया। बेतिया जिला इसका जीता-जागता उदाहरण हो सकता है। समस्तीपुर में भी बेंच-डेस्क से लेकर स्कूल के बिल्डिंग की मरम्मति व अन्य कार्यों में ठेकेदार से लेकर पत्रकार तक शामिल हो गए। शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार लिपिकों ने भी खुब कमिशन कमाया है। पटना से लेकर दिल्ली तक में संपत्ति अर्जित कर वह ‘आनंद’ में हैं।
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