समस्तीपुर :- समस्तीपुर जिले में ठंड ने दस्तक दे दिया है। इससे लोगों को सुबह और शाम ठंड का अहसास होने लगा है। दो दिनों से सुबह दस बजे तक कुहासा भी लगा रहता है। जिससे लोगों ने गर्म कपड़े का उपयोग करना भी शुरू कर दिया है। बाजार में भी स्वेटर जैकेट कनपटी मफलर बिक्री शरू हो गई है। जैकेट सहित अन्य गर्म कपड़े खरीदने के लिए लोग दुकानों पर पहुंच रहे हैं। आकर्षक वैरायटी के स्वेटर जैकेट लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
इस बार स्वेटर भी आकर्षक वैरायटी के बाजार में उपलब्ध है। लांग स्वेटर इनरवेयर फुल स्वेटर टी शर्ट की भी अच्छी मांग है। नन्हे बच्चों के लिए इस बार आकर्षक स्वेटर के साथ जैकेट भी बाजार में पहुंचा है। युवाओं में गर्म टी शर्ट की अच्छी मांग है। महिलाएं स्वेटर खरीदना पसंद कर रही है तो युवतियां जैकेट खरीदना पसंद कर रही है। बाजार में स्वेटर 200 से 2000 तक उपलब्ध है। वहीं जैकेट 500 से लेकर 3000 तक दुकानों में उपलब्ध है ठंड बढ़ने के साथ कंबल की भी मांग बढ़ गई है। 600 से लेकर 5000 तक उपलब्ध है। ठंड को ध्यान में रखकर गर्म कपड़े का स्टॉक बड़ी मात्रा में व्यवसायियों ने दुकान में मंगवा लिया है।
कपड़ा व्यवसायी इरफान अंसारी, सुभाष जटिया आदि ने कहा की ठंड के चलते गर्म कपड़े का मांग बढ़ गई है। ठंड से बचाव के लिए लोगों ने गर्म कपड़े की खरीदारी शुरु कर दी है। इस बार जैकेट के साथ स्वेटर काफी आकर्षक वेराइटी में उपलब्ध है। ठंड बढ़ने के साथ गर्म कपड़े की खरीदारी और बढ़ जाएगी।
गर्म कपड़े आते है दिल्ली व लुधियाना से
जिले भर में सबसे ज्यादा गर्म कपड़े दिल्ली व लुधियाना से आते हैं। मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए गर्म कपड़ों के दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं। नवंबर की शुरुआत होते ही गर्म कपड़ों के कारोबारियों ने दुकानों में स्टॉक जमा करना शुरू कर दिया था। पर्व त्योहार के बाद इसे दुकान में पूरी तरह से सजा दिया गया है। हिमाचल से आए कपड़ा व्यापारी राम बहादुर ने बताया कि कोट, मफलर, गर्म शॉल, स्वेटर, स्वेटर हूडी, जैकेट, लेदर का जैकेट स्वदेशी और विदेशी सभी तरह के खरीदे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 500 से 1500 रुपये तक में स्वेटर मिलता है।
रजाई-गद्दे की भराई ने पकड़ी तेजी
शहर में सड़क के किनारे रजाई गद्दे की भराई का काम भी शुरू हो गया है। लोगों ने रजाई-गद्दा खरीदना शुरू कर दिया है। कुछ लोग रजाई-गद्दा ऑर्डर देकर बनवा रहे हैं। दुकानदार जहीर ने बताया कि एक रजाई में कम से कम पांच किलो रुई की आवश्यकता होती है। जिले में 60, 80, 200 व 250 रुपये प्रति किलो रुई बेची जा रही है। 800 रुपये से रजाई की कीमत शुरू है।
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