समस्तीपुर : समस्तीपुर में हो रहे झमाझम बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल गये हैं। लगातार जारी सुखाड़ के कारण किसान परेशान थे। जून में सामान्य वर्षपात से 77 प्रतिशत कम तथा जुलाई 44 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जिले में धान की खेती प्रभावित हो रही थी। बारिश के बाद किसानों ने राहत की सांस ली है। किसानों ने धान की रोपाई में अपनी ताकत झोंक दी है।
विदित हो जुलाई तक जिले में महज 56 प्रतिशत ही धान की रोपाई हुई थी। वहीं वर्षा नहीं होने से किसानों के खेतों में लगी धान की फसल मुरझाने लगी थी। खेतों में पानी के अभाव में दरारें पड़ने लगी थी। बारिश होने से धान की फसल में जान जा गयी है। इधर बारिश को देखते हुये डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा केन्द्र ने किसानों को वर्षा जल का लाभ उठाते हुये किसानों को प्राथमिकता के आधार पर धान की रोपाई प्राथमिकता के आधार पर करने की सलाह दी है।
वहीं, रोपे गये धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के कार्य को प्राथमिकता देने को कहा है। वहीं धान की खड़ी फसल में कीट व्याधि का निरीक्षण करते रहने की सलाह दी है। विदित हो कि जिले में इस बार कृषि विभाग के द्वारा 77376 हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित कर रखा है। किसानों के द्वारा इसके लिये 7737 हेक्टेयर में धान की बिचड़ा भी गिराया गया। लेकिन वर्षा के दगाबाजी के कारण किसान शत-प्रतिशत रोपाई नहीं पाये थे, अब मौसम ने साथ दिया तो किसान एक बार अपने खाली पड़े खेतों में धान की रोपाई में जुट गये हैं।
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