चिराग पासवान की राह चले पशुपति पारस, हाजीपुर और समस्तीपुर समेत पांचो सिटिंग सीट भी लड़ेगी रालोजपा

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बिहार में एनडीए के घटक दलों के बीच लोकसभा सीट के बंटवारे में भतीजे चिराग पासवान को बीजेपी से मिली तवज्जो के बाद केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी रालोजपा सारी सिटिंग सीट लड़ेगी। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) के पास इस समय लोकसभा में हाजीपुर सीट से पारस के अलावा नवादा से चंदन सिंह, खगड़िया से महबूब अली कैसर, समस्तीपुर से प्रिंस राज और वैशाली से वीणा सिंह शामिल हैं। इसमें वीणा और महबूब चिराग की शरण में लौट चुके हैं। बिहार एनडीए में इस समय बीजेपी और नीतीश की जेडीयू के अलावा चिराग की लोजपा-आर, पारस की रालोजपा, जीतनराम मांझी की हम और उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो शामिल है। वीआईपी के मुकेश सहनी से बातचीत जारी है।
बिहार में एनडीए के सीट बंटवारे का फॉर्मूला अभी तक सामने नहीं आया है। सभी घटक दलों के बीच सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति नहीं बनी है इसलिए बीजेपी की दो-दो लिस्ट आने के बाद भी बिहार से किसी कैंडिडेट के नाम की घोषणा नहीं हुई है। सूत्रों के हवाले से जो बातें सामने आई है उसके मुताबिक बीजेपी ने चिराग को साथ लेने और पारस को डंप करने का मन बना लिया है। यहां तक कि हाजीपुर सीट से चिराग के लड़ने की जिद को भी बीजेपी ने मान लिया है जो पारस को सीधा झटका है जो इस सीट को रामविलास के राजनीतिक वारिस के तौर पर अपना बताते रहे हैं। चर्चा है कि बीजेपी ने चिराग को पांच सीट देने और पारस को राज्यसभा जाने या राज्यपाल बनने का ऑफर दिया है।

पारस और उनकी पार्टी चिराग को मिले महत्व से काफी नाराज हैं। पारस ने कहा है कि उनकी पार्टी एनडीए कैंडिडेट की लिस्ट का इंतजार करेगी। उनकी पार्टी को उचित सम्मान नहीं मिला तो उनके सारे विकल्प खुले हैं। पारस के पांच सांसद जिन सीटों से 2019 में जीते थे, वहां रालोजपा लड़ेगी। पारस ने यह भी कहा है कि उनकी पार्टी विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया अलायंस में शामिल नहीं होगी। पारस की पार्टी के प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कहा है कि बीजेपी ने उनकी पार्टी के साथ अन्याय किया है जबकि उनकी पार्टी और उसके नेता और कार्यकर्ता पूरी मित्रता के साथ भाजपा के साथ काम करते रहे।

पारस के बयान से लग रहा है कि वो चिराग की राह पर चल पड़े हैं जो 2020 के विधानसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी के गुण गाते रहे लेकिन एनडीए से अलग होकर जेडीयू की सीटों पर चुनाव लड़ गए। हालांकि चिराग को तब बड़ी नाकामी मिली और सिर्फ एक विधायक बेगूसराय जिले की मटिहानी सीट से जीत पाया था। लोजपा के इकलौते विधायक राजकुमार सिंह भी बाद में जेडीयू में शामिल हो गए।





