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लापरवाही मामले में डेढ़ दर्जन PHC प्रभारी से DM ने किया जवाब-तलब, डॉक्टरों की उपस्थिति काफी कम होने पर नाराज

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समस्तीपुर :- समस्तीपुर समाहरणालय सभागार में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक हुई। इसमें डीएम योगेंद्र सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की। इस क्रम में योजनाओं में बेहतर प्रदर्शन नहीं करने के कारण लगभग दर्जन भर पीएचसी प्रभारियों से जवाब तलब किया। वहीं सदर अस्पताल के ओपीडी में डॉक्टरों की उपस्थिति काफी कम होने पर नाराजगी जतायी। साथ ही डीएस को ओपीडी की सेवा में सुधार लाने का सख्त निर्देश दिया गया।

समीक्षा के दौरान पाया गया कि भव्या पोर्टल के तहत ही अस्पतालों में आने वाले सभी मरीजों को भव्या पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन निबंधन एवं दवा वितरण किया जाना है, लेकिन इसकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस पर डीएम ने वैसे स्वास्थ्य संस्थान जो 50 प्रतिशत से कम मरीजों का निबंधन एवं दवा वितरण करने वाले पर नाराजगी जतायी। इस मामले में पीएचसी वारिसनगर, शिवाजीनगर, एपीएचसी सलेमपुर, रुपौली, विरसिंगपुर एवं चंदौली के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। साथ ही अगली बैठक में भव्या के जिला समन्वयक को उपस्थित होने का भी आदेश दिया है।

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ओपीडी में सुधार लाने का आदेश :

समीक्षा के दौरान सदर अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सकों के द्वारा देखे गये मरीजों की संख्या का समीक्षा की गयी। इस दौरान डॉ. राजीव झा, डॉ. अदिति प्रियदर्शनी, डॉ. ईशरत परवीन, डॉ. राजेश कुमार यादव, डॉ. मनीष कुमार के द्वारा पांच पांच दिन एवं डॉ. एनके चौारी के द्वारा चार दिन ही ओपीडी में मरीजों की जांच की गयी, जो काफी कम है। ऐसी स्थिति को देखते हुए डीएम ने डीएस को ओपीडी की की संख्या में आवश्यक सुधार लाने का आदेश दिया। साथ ही चिकित्सक वार किये गये ओपीडी एवं आपातकालीन सेवा दिनों की संख्या से संबंधित प्रतिवेदन देने का आदेश दिया गया।

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आरबीएसके में भी मांगा गया जवाब :

आरबीएसके के तहत चलन्त चिकित्सा दल के द्वारा विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में किए गए कार्यो का समीक्षा की गयी। जिसमें पीएचसी मोहनपुर 57 प्रतिशत बच्चों की जांच की गयी। इसी प्रकार पीएचसी पूसा में 56, बिथान में 55, सरायरंजन में 54, विभूतिपुर में 51, वारिसनगर में 19 प्रतिशत, जबकि हसनपुर एवं पटोरी में आरबीएसके टीम में चिकित्सक पदस्थापित नहीं होने के कारण उपलब्धि शून्य है। जबकि प्रत्येक टीम के द्वारा कम से कम 80 बच्चों का स्वास्थ्य जांच प्रतिदिन किया जाना है, जो अन्य संस्थानों एवं जिला की औसत उपलब्धि 63 प्रतिशत से अपेक्षाकृत काफी कम है। इस मामले में डीएम ने संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सुधार लाने एवं संबंधित टीम के डॉक्टरों से जवाब तलब करने का आदेश दिया है।

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18 पीएचसी प्रभारी से मांगा गया जवाब :

अनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अन्तर्गत 06-59 महिने की उम्र के बच्चों को दिये गये आयन सिरफ की समीक्षा के दौरान पीएचसी उजियारपुर एवं पूसा को छोड़कर अन्य सभी स्वास्थ्य संस्थानों की उपलब्धि 40 प्रतिशत से अपेक्षाकृत काफी कम है, जिस पर डीएम ने संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से जवाब तलब करने का निर्देश सीएस को दिया।

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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में भी जवाब :

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अन्तर्गत सभी संस्थानों को हाई रिक्स प्रेगनैंसी को चिन्हित करने का निदेश दिया गया। कुछ स्वास्थ्य संस्थान में हाई रिक्स प्रेगनैंसी में दस के बदले मात्र 5 प्रतिशत उपलब्धि रही। जिसके कारण ताजपुर, बिथान, शिवाजीनगर, मोहनपुर, हसनपुर एवं समस्तीपुर की उपलब्धि काफी कम रहने के कारण पीएचसी प्रभारी से जवाब तलब करते हुए इसमें सुधार करने का निर्देश दिया है।

डॉक्टरों एवं एएनएम से जवाब तलब :

ई संजीवनी कार्यक्रम के अन्तर्गत कुल किए गए टेली कंसलटेशन की समीक्षा के क्रम में सौ से कम मरीजों को देखने वाले चिकित्सकों से जवाब तलब किया गया है। इसमें डा. प्रज्ञा प्राची, प्रियंका प्रियर्दशनी, रीचा कुमारी, रतन प्रिया, विकास, जाहिन फातमा, कृष्णा सिंह, पल्लवी कुमारी, रवि राज, आर्या, प्रियंका कुमारी, विकास कुमार, कुमारी करिश्मा, रिया एवं रागीब अंसारी से जवाब तलब किया गया है।

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वहीं शून्य कॉल करने वाले एएएम व सीएचओ से भी कारण पूछा गया है। साथ ही 500 से कम टेली कनसलटेशन करने वाले स्पोक्स बिथान, वारिसनगर, मोरवा, मोहनपुर, शिवाजीनगर, हसनपुर, पूसा, रोसड़ा, पटोरी एवं मोहिउद्वीननगर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से भी जवाब तलब करने का आदेश सीएस को दिया गया है। प्रथम त्रैमास में प्रसव पूर्व जाँच में पंजीकरा नहीं करने के कारा भी कई पीएचसी प्रभारी से जवाब मांगा गया है। वहीं प्रसव पूर्व चार जांच कराने का सख्त निर्देश दिया गया है।

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