मौसम में बदलाव होने के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ा, रात में ठंड व दिन में गर्मी से लोग हो रहे बीमार

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समस्तीपुर :- मौसम में बदलाव होने के साथ ही मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है। रात में ठंड व दिन में गर्मी से लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं। इससे इन दिनों सदर अस्पताल के ओपीडी में मौसम जनित बीमारी के शिकार लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। वर्तमान में स्थिति यह है कि थोड़ी सी लापरवाही होते ही लोगों को सर्दी जुकाम जकड़ ले रहा है, वहीं देह हाथ के दर्द व ठंड के साथ ही बुखार भी लोगों को सताने लगा है। सदी अस्पताल के ओपीडी में इन दिनों सर्दी, खांसी व बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक पहुंच रही है। केवल सदर अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले मरीजों में पचास प्रतिशत से अधिक मरीज मौसमी बीमारी से ग्रसित लोगों की है।

मंगलवार को भी ओपीडी में लगभग चार सौ से अधिक मरीज पहुंचे। पर्व का मौसम होने के बाद भी मरीजों की संख्या अधिक थी। डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने बताया कि मंगलवार को लगभग दो सौ से अधिक मरीजों में केवल सर्दी, खांसी व बुखार के थे। यह मौसम के बढ़ते गिरते तापमान के कारण हो रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरुरत है। शाम व सुबह के समय घर से निकलने से पूर्व शरीर को पूरी तरह से ढंकने वाला कपड़ा पहन कर निकलना चाहिए।

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हर आयु वर्ग के लोग हैं प्रभावित:

डॉ. गिरीश कुमार ने कहा कि मौसमी बीमारी के कारण हर आयु वर्ग के लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधान और सतर्क रहने की जरूरत है। इस मौसम में सर्दी-खांसी, बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों की संभावना अधिक रहती है। बच्चों व बुजुर्गों के प्रति विशेष ख्याल रखने की जरुरत है।

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टायफाइड से बचाव की जरुरत:

मौसमी बीमारी में टायफाइड होने की भी संभावना रहती है। यह बीमारी मुख्य रूप से गंदा (दूषित) पानी और भोजन का सेवन होता है। इसलिए, इस बीमारी से बचाव के लिए सभी लोगों को शुद्ध पेयजल और गर्म भोजन का सेवन करना चाहिए।

टायफाइड साल्मोनेला टाइपी नामक बैक्टीरिया से फैलने वाला एक गंभीर रोग है। यह बैक्टीरिया दूषित पानी एवं संक्रमित भोजन में पनपता है।

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टायफाइड के कारण व बचाव:

सब्जियों का सही से नहीं धोना, शौचालय का इस्तेमाल नहीं होना और खुले में मलमूत्र त्याग करना, खाने से पहले हाथों को नहीं धोना आदि टायफाइड का कारण हो सकता है।

टाइफाईड का लक्षण: एनसीडीओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि तेज बुखार के साथ दस्त व उल्टी होना, बदन दर्द रहना, कमजोरी और भूख नहीं लगना टाइफाइड के प्रमुख लक्षण हैं। इसके साथ ही पेट, सिर और मांसपेशियों में भी दर्द रहता है। उन्होंने बताया कि यह पाचन तंत्र को अधिक प्रभावित करता है।

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हर बुखार डेंगू नहीं होता: मौसमी बीमारी में बुखार दो दिन से अधिक होते ही लोगों में डेंगू का डर समा जाता है। लेकिन हर बुखार डेंगू नहीं होता है। फिर भी लोगों को डेंगू के प्रति सतर्क रहने की जरुरत है। सदर अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नागमणी राज ने बताया कि मौसमी व वायरल फ्लू तीन दिन तक रहता है। लेकिन इन दिन दिनों में बुखार का तापमान, शरीर की प्रतिक्रिया, मरीज की स्थिति आदि को भी वाच करने की जरुरत है। बुखार लगातार बरकरार रहता है तो इसकी जांच कराना आवश्यक है। इसके बाद बुखार के बारे में पता चलेगा कि यह किस टाइप की बुखार है। लोगों को डरने की नहीं, सजग व सतर्क रहने की जरुरत है।

104 पर भी मिलेगी जानकारी:

मौसमी बीमारी या फिर अन्य बीमारी संबंधित किसी भी तरह की समस्या के लिए स्वास्थ्य विभाग के टॉल फ्री नंबर 104 पर भी कॉल करके जानकारी ली जा सकती है। कोई भी व्यक्ति टॉल फ्री नंबर पर कॉल कर अपनी बीमारी के बारे में बताकर इसका समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

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