Politics

नीतीश से तकरार फिर इकरार, जीतनराम मांझी की पार्टी HAM का सियासी सफरनामा दिलचस्प है

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्यूलर) के गठन की कहानी दिलचस्प है। हम ने सरकार, तकरार और फिर सत्कार की सियासी यात्रा तय कर एक मुकाम हासिल किया है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए से अलग होकर जदयू 38 सीटों पर लड़ा और उसे सिर्फ दो पर ही जीत मिली। हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने आधा दर्जन बार के विधायक तथा महादलित समाज से आने वाले जदयू विधायक और तत्कालीन मंत्री जीतन राम मांझी को सीएम का पद सौंप दिया।

20 मई 2014 को मांझी ने सीएम पद की शपथ ली। मुख्यमंत्री बनने के कुछ महीने बाद ही मांझी के फैसलों और तेवर पर पार्टी में सवाल उठने लगे। जदयू नेता असहज महसूस करने लगे। मांझी और पार्टी नेतृत्व में संवादहीनता की स्थिति बन गई। इसके बाद नीतीश कुमार ने 12 फरवरी 2015 को 130 विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन मार्च किया और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से कहा कि जीतनराम मांझी के पास मात्र दस विधायकों का समर्थन है, इसलिए इस मसले पर वह हस्तक्षेप करें।

अंतत: मांझी के समक्ष भी विश्वास मत हासिल करने की नौबत आयी और इससे पहले उन्होंने राजभवन जाकर अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद नीतीश कुमार ने 22 फरवरी 2015 को फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद मांझी ने अपनी पार्टी ‘हम’ की स्थापना की।

कांग्रेस, जद, राजद, जदयू से मांझी का नाता :

वैसे, मांझी का नाता कई पार्टियों से रहा है। वर्ष 1980 में सबसे पहले वह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने थे। बाद में वह जनता दल, राजद और फिर जदयू में रहे। वर्ष 2015 में पार्टी के गठन के महज पांच साल बाद 2019 में मांझी फिर जदयू के कोटे से ही एनडीए का हिस्सा बने। अब हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) अपनी स्थापना का एक दशक पूरा कर चुका है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने आठ मई 2015 को इस पार्टी की स्थापना की थी।

पिता, पुत्र दोनों मंत्री :

स्थापना के बाद यह पार्टी अब तक दो विधानसभा (2015 और 2020) और दो लोकसभा चुनाव (2019 और 2024) लड़ी है। हम सेक्युलर दोनों विधानसभा चुनाव एनडीए गठबंधन में लड़ा। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ था तो 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले उतरा। वर्तमान में हम सेक्युलर से जीतन राम मांझी इकलौते सांसद हैं और वह केन्द्र सरकार में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री हैं। मांझी के पुत्र तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन राज्य सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री हैं। फिलहाल इस पार्टी के चार विधायक हैं।

2020 में पहली बार मंत्री बने संतोष कुमार सुमन :

संतोष कुमार सुमन मई 2018 में विधान परिषद के सदस्य चुने गये। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में 2020 में बनी एनडीए सरकार में वी पहली बार मंत्री बने। 16 नवंबर 2020 से 09 अगस्त 2022 तक लघु जल संसाधन और एससी-एसटी कल्याण विभाग के मंत्री का कार्यभार संभाला। वर्तमान में लघु जल संसाधन विभाग का कार्यभार संभाल रहे हैं।

हम (से) का अब तक का सफर :

विधानसभ/लोकसभा लड़े सीट जीते सीट वोट प्रतिशत

2015 विधानसभा 21 01 2.3 फीसदी

2020 विधानसभा 07 04 0.83 फीसदी

2019 लोकसभा 03 00 2.40 फीसदी

2024 लोकसभा 01 01 2.30 फीसदी

मांझी की समधन और बहू विधायक, बेटा विधान पार्षद :

हम सेक्युलर के वर्तमान में जीते चार विधायकों में तीन अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट से चुने गये हैं। कुल चार विधायकों में से तीन विधायक गया जिले के हैं। पार्टी के संस्थापक जीतन राम मांझी की समधन ज्योति देवी गया जिले के बाराचट्टी सुरक्षित सीट से विधायक हैं। गया जिले के ही इमामगंज सुरक्षित सीट से जीतन राम मांझी के इस्तीफे के बाद 2024 में हुए विधानसभा उपचुनाव में इस सीट पर उनकी बहू दीपा मांझी ने जीत हासिल की। जमुई के सिकंदरा सुरक्षित सीट से प्रफुल्ल कुमार मांझी विधायक हैं। गया के टिकारी से अनिल कुमार विधायक हैं, जो वर्तमान में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

Avinash Roy

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