बिहार में चल रही जनगणना के पहले चरण में लगभग 47 लाख परिवारों ने स्वगणना पूरी कर ली है। स्वगणना का काम 17 अप्रैल को शुरू हुआ था और 1 मई को खत्म हो गया। अब शनिवार 2 मई से मकान सूचीकरण का काम शुरू हो गया है। इसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर मकानों का गिनती और उनका सूचीकरण करेंगे। साथ ही जिन परिवारों ने पहले स्व-गणना कर ली है, उनकी आईडी लेकर सत्यापन भी किया जाएगा। सरकार ने लोगों को जनगणना की आड़ में साइबर फ्रॉड को लेकर भी चेताया है। लोगों से बैंक अकाउंट डिटेल, ओटीपी जैसी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की अपील की है।
बिहार राज्य में चल रहे जनगणना के संबंध में एक प्रेस वार्ता का आयोजन आज जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार एवं पत्र सूचना कार्यालय, पटना द्वारा किया गया। आयोजित प्रेस वार्ता में रंजिता, निदेशक, जनगणना कार्य, बिहार ने प्रथम चरण के अंतर्गत स्व-गणना की प्रगति और आगे की तैयारी की जानकारी दी।
बिहार में जनगणना कार्य की निदेशक रंजीता ने शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने स्व-गणना में सहयोग के लिए जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 1 मई तक बिहारवासियों ने लगभग 47 लाख (46,82,284) स्व-गणना पूरी की है। अब सभी प्रगणक और पर्यवेक्षक अपने-अपने आवंटित हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में जाकर CMMS पोर्टल पर बनाई गई डिजिटल सीमाओं का भौतिक सत्यापन करेंगे। अगर इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसे पर्यवेक्षक के माध्यम से चार्ज अधिकारी द्वारा ठीक किया जाएगा।
इसके बाद सभी मकानों को क्रमांक दिया जाएगा और फिर हर मकान की गिनती, परिसंपत्तियों और सुविधाओं से संबंधित जानकारी HLO ऐप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। जिन परिवारों ने पहले ही स्व-गणना की है, उनकी आईडी लेकर सत्यापन किया जाएगा।
इसके बाद सभी मकानों को क्रमांक दिया जाएगा और फिर हर मकान की गिनती, परिसंपत्तियों और सुविधाओं से संबंधित जानकारी HLO ऐप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। जिन परिवारों ने पहले ही स्व-गणना की है, उनकी आईडी लेकर सत्यापन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सभी जिलों में निदेशालय के अधिकारियों को भेजा गया है जो स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर कार्य की निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। डेटा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए समय-समय पर निरीक्षण की व्यवस्था भी की गई है।
निदेशक ने बिहार के सभी लोगों से जनगणना कर्मियों का सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने लोगों से जनगणना के दौरान सही जानकारी उपलब्ध कराने को कहा। रंजीता ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। इनका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए ही किया जाता है।
वहीं, लोगों को साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की भी सलाह दी गई है। निदेश की ओर से स्पष्ट किया गया कि जनगणना कर्मी किसी भी परिस्थिति में ओटीपी, बैंक विवरण, आधार, पैन की जानकारी अथवा किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं करते हैं। किसी भी शंका, शिकायत अथवा जानकारी के लिए जारी टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क करने को कहा गया है।
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