बाबा केवल महाराज के चीता की आग बुझाने समस्तीपुर के इंद्रबारा आयी थी गंगा मैया, 700 वर्ष पूर्व हुआ था जन्म

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समस्तीपुर/पटोरी :- सांप्रदायिक सौहार्द के संस्थापक एवं अग्रदूत थे बाबा केवल महाराज। जिले के मोरवा प्रखंड अंतर्गत इन्द्रवारा पंचायत में बाबा केवलश जन्म एवं निर्वाण दिवस पर रामनवमी के अवसर पर राजकीय मेले का आयोजन होता है। बाबा केवल स्थान मेला की महत्ता को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2010 में इस मेले को राजकीय मेला घोषित किया था। तभी से राज्य सरकार द्वारा राजकीय मेले के लिए प्रति वर्ष लाखों रुपये इस पर खर्च किए जाते हैं।

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बाबा केवल महाराज की समाधिस्थल के निकट लगने वाले इस मेले में देश के विभिन्न स्थानों से लाखों श्रद्धालु आते हैं। पूजा अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं के द्वारा बकरे की बलि भी दी जाती है। मेले का मुख्य आकर्षण बाबा केवल की समाधिस्थल पर घोड़ा पर सवार प्रतिमा एवं पूर्वी किनारे निषाद विकास संघ के द्वारा निर्मित 35 फीट उंची प्रतिमा नये रंग रोगन के साथ अपना सौंदर्य बिखेर रही है।

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बताया जाता है कि करीब 700 वर्ष पूर्व रामनवमी के दिन बाबा केवल महाराज का जन्म हुआ था। बिहार के महान लोक देवता महाराज शैलेश के समय केवल महाराज की वीरता का डंका बजता था। आज से वर्षों पूर्व से शिउरा पटोरी में लोक देवता अमर सिंह के साथ हिंदू – मुस्लिम संघर्ष को सांप्रदायिक सौहार्द में बदल दिया था। बाबा केवल महाराज इस प्रकार सांप्रदायिक सौहार्द के अग्रदूत थे।

बताया जाता है कि विरोधियों द्वारा षडयंत्र पूर्वक 700 शेर एवं बाघों से इन पर आक्रमण कराया गया था। इन्होनें अपनी वीरता और पराक्रम से 700 भागों को चीर कर मार डाला था। एक मादा शेरनी स्त्री जाति के होने एवं स्त्री जाति के सम्मान करने की खातिर उसे नहीं मारते हुए राम नवमी के दिन ही अपना प्राणोत्सर्ग किया था।

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आस्थावान कहते हैं कि बाबा केवल महाराज की चिता को बुझाने के लिए उनकी समाधि स्थली इंद्रवाड़ा में गंगा मैया आई थी। तब से उनके जन्म एवं परिनिर्वाण दिवस पर उनकी समाधि स्थली पर मेला लगता है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनकी समाधि स्थल के आसपास सर्पदंश की घटना से अब तक कोई नहीं ममरा है। उनकी समाधि स्थली पर सालों भर सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार को मेला लगता है।

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