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मोदी-बीजेपी विरोधी मोर्चेबंदी में नीतीश से आगे केसीआर, एक साथ केजरीवाल, अखिलेश और लेफ्ट को जुटाया

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लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी में तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर बिहार सीएम नीतीश कुमार से आगे निकल गए हैं। चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर ने बुधवार को तेलंगाना के खम्मम में विशाल जनसभा का आयोजन किया, जिसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, पंजाब के सीएम भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन और लेफ्ट पार्टियों के नेता पहुंचे। खास बात ये है कि विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम में जुटे नीतीश कुमार को इस कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।

केसीआर की पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति के भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) बनने के बाद पहली बार तेलंगाना में बड़ी रैली का आयोजन हुआ है। बुधवार को खम्मम में जनसभा से पहले केसीआर सभी नेताओं को यादाद्री स्थित लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर में ले गए और दर्शन कराए। इसके बाद खम्मम में किसानों को समर्पित जनसभा को संबोधित किया।

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क्या है केसीआर की रणनीति?

केसीआर की नजर 2024 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मजबूत तीसरा मोर्चा बनाने पर टिकी है। जिन पार्टियों को उन्होंने खम्मम में आमंत्रित किया, वे सभी इस मोर्चे में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। बीआरएस के नेता और कार्यकर्ता केसीआर को पीएम उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं। केसीआर खुद कह चुके हैं कि वे अब राष्ट्रीय स्तर की राजनीति करेंगे। ऐसे में विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की उनकी इस मुहिम को बीजेपी के खिलाफ रणनीति में अहम माना जा रहा है।

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कांग्रेस से किनारा

लोकसभा इलेक्शन से पहले तेलंगाना में इस साल के अंत तक विधानसभा का चुनाव होना है। तेलंगाना में कांग्रेस, बीआरएस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी है। बीजेपी भी तेलंगाना में अपना आधार बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही है। बीजेपी की हाल ही में हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में जेपी नड्डा ने जिन 9 राज्यों के चुनाव में जीत का लक्ष्य रखा है, उसमें तेलंगाना प्रमुख है। ऐसे में केसीआर नहीं चाहते कि राष्ट्रीय स्तर पर वे ऐसे किसी गठबंधन में शामिल हों, जिसमें कांग्रेस या बीजेपी शामिल हो। उनकी रणनीति साफ है, वे एक ऐसा मोर्चा बनाना चाहते हैं, जो बीजेपी के खिलाफ हो और उसमें कांग्रेस नहीं हो।

केसीआर ने नीतीश कुमार को क्यों नहीं बुलाया?

पिछले साल अगस्त में बीजेपी से अलग होने के बाद बिहार सीएम नीतीश कुमार ने 2024 चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने का ऐलान किया। इसके कुछ दिनों बाद केसीआर पटना आए थे और उन्होंने नीतीश कुमार और लालू यादव समेत अन्य नेताओं से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं ने पटना में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्षी एकता को बढ़ावा देने की घोषणा की। इसके बाद जेडीयू नेता ने नीतीश को विपक्ष का पीएम कैंडिडेट के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया और यहीं से बात बिगड़ गई।

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दरअसल, नीतीश कुमार खुद को विपक्ष का उम्मीदवार प्रधानमंत्री बनाने की जुगत में लगे हुए हैं। मगर केसीआर, अरविंद केजरीवाल जैसे अन्य नेताओं की भी यही महत्वकाक्षाएं हैं। नीतीश ने अक्टूबर में दिल्ली में सोनिया गांधी, अरविंद केजरीवाल, शरद यादव सरीखे विपक्षी दलों के कई नेताओं से मुलाकात की थी। मगर गठबंधन को लेकर किसी से भी बात नहीं बन पाई। नीतीश की मुहिम ठंडे बस्ते में चली गई।

वहीं दूसरी ओर, केसीआर ने कांग्रेस को साइडलाइन करते हुए अलग मोर्चा बनाने की कवायद शुरू कर दी है, जो कि अब रंग लाती हुई नजर आ रही है। नीतीश कुमार कांग्रेस का साथ छोड़ना नहीं चाहते हैं। वहीं, केजरीवाल-अखिलेश एवं केसीआर जैसे नेता कांग्रेस को विपक्षी मोर्चे में नहीं चाहते हैं। यही वजह है कि केसीआर अब नीतीश कुमार से अलग रहकर विपक्षी मोर्चा बना रहे हैं, जिसमें उन्हें शामिल नहीं किया गया है।

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नीतीश अब क्या करेंगे?

नीतीश कुमार फिलहाल बिहार में समाधान यात्रा निकाल रहे हैं। पिछले दिनों उनसे राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ा सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा का बजट सत्र होने के बाद वे देश की यात्रा पर निकलेंगे। पिछले साल शुरू हुई उनकी विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम फिलहाल ठंडे बस्ते में है, कयास लगाए जा रहे हैं कि नीतीश जल्द ही फिर से उसपर काम करना शुरू करेंगे।

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