बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम को झटका लगने वाला है। खबर है कि तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव (केसीआर) मकर संक्रांति के बाद बड़ी रैली करने वाले हैं। इसमें समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेताओं को बुलाया गया है। मगर अभी तक नीतीश कुमार को न्योता नहीं दिया गया है। जेडीयू एक तरफ नीतीश कुमार को विपक्ष के पीएम उम्मीदवार के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है, दूसरी ओर देश के प्रमुख विपक्षी दलों के जुटान में बिहार सीएम को बुलावा नहीं मिलने से सियासी हलके में चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर अपने राज्य में 18 जनवरी को बड़ी रैली करने वाले हैं। यह रैली खम्मम में आयोजित होने की बात सामने आ रही है। केसीआर द्वारा अपनी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति को भारत राष्ट्र समिति में बदले जाने के बाद राष्ट्रीय स्तर की यह बड़ी रैली होगी। इसमें देश भर के अधिकतर विपक्षी दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजा गया है।
इनमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन जैसे नेता शामिल हैं। हालांकि अभी तक नीतीश कुमार को इस रैली में निमंत्रण भेजे जाने की कोई खबर नहीं आई है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम दावेदारी पर नजर गड़ाए बैठे नीतीश को प्रमुख विपक्षी दल साइडलाइन करने की सोच रहे हैं। हालांकि, अभी तक केसीआर की रैली की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
दरअसल, नीतीश कुमार ने पिछले साल अगस्त में बीजेपी को छोड़कर महागठबंधन के साथ बिहार में सरकार बनाई, तब राष्ट्रीय राजनीति में जाने का भी ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वे 2024 चुनाव से पहले देश भर के विपक्षी दलों को बीजेपी के खिलाफ एकजुट करेंगे। इसके बाद तेलंगाना सीएम केसीआर बिहार आए और नीतीश से उनकी मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने पटना में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्षी एकजुटता की मुहिम को आगे बढ़ाने की बात कही थी। हालांकि, उस वक्त विपक्षी पीएम कैंडिडेट कौन होगा, इस सवाल पर दोनों ने गोलमोल जवाब दिया।
इसके बाद नीतीश कुमार ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल, सोनिया गांधी, शरद पवार समेत कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की। मगर गठबंधन को लेकर अभी तक कोई खास बात नहीं बन पाई है। जेडीयू के नेता पहले ही नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बता चुके हैं। मगर राहुल गांधी, केसीआर, अरविंद केजरीवाल और ममता बनर्जी सरीखे नेताओं की भी अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं।
ऐसे में पीएम पद की दावेदारी को लेकर विपक्षी दलों में एकजुटता नहीं बन पा रही है। नीतीश अभी बिहार में समाधान यात्रा निकाल रहे हैं। फरवरी महीने के उनके देशभर की यात्रा पर भी निकलने की योजना है। वे खुद को दूसरे विपक्षी नेताओं से बेहतर पीएम कैंडिडेट प्रोजेक्ट करने में जुटे हैं। नीतीश की विपक्षी एकता की मुहिम फिलहाल ठंडे बस्ते में है, अब आगे क्या यह रंग लाएगी या नहीं, यह तो वक्त बताएगा।
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