Bihar

बिहार में भाजपा से सीएम कौन, नीतीश राज्यसभा गए तो सम्राट, नित्यानंद या कोई और मुख्यमंत्री?

बिहार में होली के बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपना पद छोड़कर राज्यसभा जा सकते हैं। बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का सीएम बन सकता है। नीतीश की जगह सीएम कौन बनेगा इस पर भी अटकलबाजी शुरू हो गई है। भाजपा में कई नाम चर्चा में चल रहे हैं। इसमें नीतीश सरकार में अभी नंबर दो की हैसियत रखने वाले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय भी नाम रेस में हो सकता है। हालांकि, भाजपा किसी नए चेहरे को कुर्सी पर बैठाकर चौंका भी सकती है। दिल्ली, राजस्थान, ओडिशा, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य इसके उदाहरण हैं।

सम्राट चौधरी

अगर भाजपा सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद पर बैठाती है तो यह कोई चौंकाने वाला फैसला नहीं होगा। सम्राट अभी डिप्टी सीएम हैं और राज्य का सबसे अहम माने जाने वाला गृह विभाग भी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह वित्त मंत्री रह चुके हैं। सम्राट चौधरी भाजपा का कोइरी (कुशवाहा) जाति से संबंध रखते हैं जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में आती है। बिहार की राजनीति में कोइरी और कुर्मी वोटबैंक सबसे अहम माना जाता है, इसे लवकुश समीकरण भी कहते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू इसी समीकरण की राजनीति करती आई है।

नित्यानंद राय

दूसरे ओबीसी चेहरा में नित्यानंद राय भाजपा में सबसे प्रमुख हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भरोसेमंद नेता माने जाते हैं। बतौर सीएम केंद्रीय नेतृत्व की भी वह पसंद हो सकते हैं। उन्हे सरकार और संगठन का लंबा अनुभव है। अभी मोदी सरकार में गृह राज्य मंत्री हैं और इससे पहले बिहार के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि नित्यानंद राय यादव समाज से आते हैं। बिहार में इस जाति की आबादी सबसे ज्यादा है। लालू एवं तेजस्वी की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के यादव प्रमुख वोट बैंक रहे हैं।

तीसरा नाम किसका

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संभावना है कि भाजपा का संभावित सीएम पिछड़ा वर्ग से ही हो सकता है। अगर पार्टी किसी सवर्ण चेहरे को आगे करती है तो मंगल पांडेय का नाम प्रमुख रहेगा। वह भाजपा का बड़ा ब्राह्मण चेहरा हैं और केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद नेता हैं। बिहार के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं, अभी नीतीश सरकार में स्वास्थ्य एवं विधि विभाग संभाल रहे हैं। दूसरे राज्यों में भी पार्टी के काम को देखते हैं। संगठन और सरकार में उनका भी लंबा अनुभव है।

बिहार में भी चौंकाएगी भाजपा?

चर्चा यह भी चल रही है कि भाजपा बिहार में कोई नया चेहरा देकर चौंका सकती है। राजस्थान में भजनलाल, मध्य प्रदेश में मोहन यादव, छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय, ओडिशा में मोहन चरण मांझी और दिल्ली में रेखा गुप्ता, ये सभी भाजपा के ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिनक नाम सीएम की रेस या चर्चा में कहीं पर नहीं था। पार्टी ने इनके नामों का ऐलान कर सभी को चौंकाया था। इसी तरह बिहार में भी किसी नए नेता को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा सरप्राइज कर सकती है।

बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें क्यों हैं?

दरअसल, बिहार में 5 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने जा रहे हैं। एनडीए की ओर से 3 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान हो गया है। इनमें भाजपा से नितिन नवीन और शिवेश कुमार राम, रालोमो से उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा उम्मीदवार हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड ने अभी तक अपने कोटे के दो प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है। नामांकन का गुरुवार को आखिरी दिन है।

पहले चर्चा चल रही थी कि नीतीश के बेटे निशांत को राजनीति में लाकर जेडीयू कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है। इसके लिए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को ड्रॉप किया जा सकता है, उनकी सीट अप्रैल में खाली हो रही है। हालांकि, बुधवार दोपहर को सियासी गलियारे में सूत्रों के हवाले से अटकलें चलने लगी कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जेडीयू के राज्यसभा उम्मीदवार बन सकते हैं।

उनकी जगह बिहार में भाजपा का सीएम बन सकता है और नीतीश के बेटे निशांत कुमार को बिहार सरकार में डिप्टी सीएम का पद दिया जा सकता है। हालांकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जेडीयू में मंथन चल रहा है, अंतिम फैसला नीतीश को ही लेना है। बुधवार रात या गुरुवार सुबह तक स्थिति साफ हो जाएगी।

Avinash Roy

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