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होर्मुज में फंसा कच्चा तेल, क्या रूस फिर बनेगा भारत का तारणहार? जानें ‘प्लान बी’

ईरान युद्ध के बीच बढ़ते तेल संकट के कारण भारत एक बार फिर से रूस का रुख कर सकता है। हालांकि भारत के लिए अभी तेल संकट का सामना नहीं करना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति में होने वाली किसी भी अल्पकालिक बाधा से निपटने के लिए भारत के पास कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त बफर (भंडार) मौजूद है। मंगलवार को जारी एक सरकारी बयान के अनुसार, सरकार वर्तमान में अपने स्टॉक (भंडार) को लेकर काफी सहज स्थिति में है। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और आशान्वित है कि जरूरत पड़ने पर हालात को संभालने के लिए चरणबद्ध तरीके से कदम उठाए जा सकते हैं।

आठ हफ्ते का स्टॉक: नई दिल्ली में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भारत के पास वर्तमान में कच्चे तेल और परिवहन ईंधन का इतना भंडार है जो लगभग आठ सप्ताह तक चल सकता है।

एलपीजी (LPG) का भंडार: खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली रसोई गैस (LPG) का स्टॉक भी लगभग एक महीने तक चलने के लिए पर्याप्त है।

संकट का कारण और होर्मुज जलडमरूमध्य

भारत जैसे प्रमुख एशियाई खरीदार काफी हद तक उस तेल पर निर्भर हैं जो होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद यह क्षेत्र एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदल गया है, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग पर यातायात काफी धीमा हो गया है और आपूर्ति की स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। भारत की अधिकांश आयातित एलपीजी भी इसी मार्ग से आती है।

सरकार की आपातकालीन योजनाएं

तैयारियां पूरी: अधिकारी ने बताया कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके लिए भारत ने आपातकालीन योजनाएं तैयार कर ली हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें लागू करने की कोई जरूरत नहीं पड़ी है।

अतिरिक्त भंडारण की आवश्यकता नहीं: सरकार को अभी अतिरिक्त तेल जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं दिख रही है और रिफाइनरियों को उनके निर्यात दायित्वों को पूरा करने की अनुमति दी जा रही है।

आपूर्ति के नए विकल्प और रूसी तेल

वैकल्पिक स्रोत: देश पहले से ही कच्चे तेल, एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) की वैकल्पिक आपूर्ति तलाश रहा है। हालांकि, अधिकारी ने उन देशों या क्षेत्रों का खुलासा नहीं किया जहां से ये विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

रूसी तेल पर विचार: सोमवार को आई ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत अन्य विकल्पों के साथ-साथ अपने तटों के पास समुद्र में खड़े रूसी तेल के जहाजों का उपयोग करने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि भारत अभी भी रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहा है (भले ही कम मात्रा में), लेकिन अधिकारी ने इस बात पर कोई टिप्पणी नहीं की कि मध्य पूर्व संकट के बीच भारत रूस से खरीदारी बढ़ाएगा या नहीं।

भारत ने रूस से ज्यादा कच्चा तेल खरीदने की नयी रूचि दिखाई है: रूसी उपप्रधानमंत्री नोवाक

रूस ने मंगलवार को दावा किया कि ईरान पर हमलों के कारण होर्मूज जलडमरूमध्य बंद होने के चलते ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने को लेकर नए सिरे से दिलचस्पी दिखाई है। रूस के उपप्रधानमंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने मॉस्को में एक कार्यक्रम से इतर सरकारी टीवी रोसिया से कहा- हां, हमें भारत की तरफ से नयी दिलचस्पी के संकेत मिल रहे हैं। रूस के ऊर्जा क्षेत्र की देखरेख करने वाले नोवाक ने इस संभावना से इंकार नहीं किया कि यूरोपीय संघ भी ऊर्जा संकट को देखते हुए रूस के हाइड्रोकार्बन आयात में कटौती के अपने फैसले में ढील बरत सकता है।

एलएनजी से जुड़ा बड़ा जोखिम

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय इसका सीमित एलएनजी (LNG) भंडार है। ईरान के एक लक्षित ड्रोन हमले के बाद, भारत के शीर्ष एलएनजी आपूर्तिकर्ता कतर ने सोमवार को उत्पादन रोक दिया है। अधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि यह आपूर्ति संकट जल्दी दूर नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में भारत को आपातकालीन उपाय लागू करने पड़ सकते हैं।

ईंधन की कीमतों पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के बावजूद, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उपभोक्ताओं को इस वैश्विक अस्थिरता से बचाने के लिए तत्काल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने के पक्ष में नहीं है।

Avinash Roy

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