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बिहार के सरप्लस शिक्षकों का तबादला कैसे होगा, समझिए पूरा नियम और अगला चरण

फाइल फोटो :

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बिहार में सरकारी शिक्षकों के तबादले का इंतजार लंबा होता जा रहा है. करीब 6 लाख शिक्षकों से जुड़ी इस प्रक्रिया में आवेदन लिए गए, लेकिन चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद काम पूरा नहीं हो सका. अब आदर्श आचार संहिता के कारण तबादले की प्रक्रिया पर रोक लगी हुई है. शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सामान्य तबादले के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल 7 नवंबर से खोले जाने की संभावना है. हालांकि, इसके लिए पहले के चरणों का काम पूरा करना जरूरी है.

7 नवंबर से खुल सकता है ई-शिक्षा कोष पोर्टल

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, सामान्य तबादले के दूसरे चरण के लिए नवंबर के दूसरे सप्ताह से पहले आवेदन शुरू होना मुश्किल दिख रहा है. अगर जिला और प्रमंडल स्तर पर लंबित काम तेजी से पूरे होते हैं, तो 7 नवंबर से आवेदन लिए जा सकते हैं. फिलहाल यह संभावित तारीख है. सामान्य तबादले की प्रक्रिया पहले चरण के पूरा होने के बाद ही आगे बढ़ेगी. इसलिए शिक्षकों को आवेदन शुरू होने के आधिकारिक निर्देश का इंतजार करना होगा.

26 जिलों में 42 हजार शिक्षकों को मिला नया स्कूल

पहले चरण में जिले के भीतर सरप्लस शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया चलाई गई. शिक्षा विभाग के मुताबिक, करीब 26 जिलों में यह काम पूरा हो चुका है. इन जिलों के लगभग 42 हजार सरप्लस शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेजा गया है. उनकी नई पोस्टिंग भी कर दी गई है.12 जिलों में यह प्रक्रिया अब भी पूरी नहीं हुई है.

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प्रमंडल स्तर पर तबादले का अगला चरण

जिले के अंदर तबादले का काम पूरा होने के बाद प्रमंडल स्तर पर शिक्षकों की पोस्टिंग की जाएगी. इस चरण में आवंटित जिले के अनुसार शिक्षकों को स्कूल दिया जाएगा और उन्हें अंतिम तबादला पत्र जारी होगा. इसके बाद राज्य स्तर पर तबादले की प्रक्रिया चलेगी. इसमें वे शिक्षक शामिल होंगे, जिन्होंने एक प्रमंडल से दूसरे प्रमंडल में जाने के लिए आवेदन किया है. इन दोनों चरणों के पूरा होने के बाद स्कूलों में उपलब्ध खाली पदों की जानकारी जारी की जाएगी. इसके आधार पर सामान्य तबादले के लिए आवेदन लिए जाने हैं.

71 हजार से ज्यादा शिक्षकों ने किया आवेदन

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 71,151 सरप्लस शिक्षकों ने अपनी पसंद के अनुसार तबादले के लिए आवेदन किया है. वहीं, राज्य में सरप्लस शिक्षकों की कुल संख्या करीब 1.60 लाख बताई गई है. इन शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अपने घर, पंचायत या प्रखंड के आसपास के स्कूल में पोस्टिंग मिल सकेगी. लेकिन प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उनका इंतजार जारी है.

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म्यूचुअल ट्रांसफर के 4259 आवेदन भी लंबित

तबादले की प्रक्रिया में म्यूचुअल ट्रांसफर यानी आपसी सहमति से स्कूल बदलने का विकल्प भी शामिल है. बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के पहले चरण में इसके लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 4,259 आवेदन आए हैं. इस प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार कर रहे शिक्षकों को भी आगे की कार्रवाई के लिए विभाग के निर्देशों का इंतजार करना पड़ रहा है.

दो बार बदला गया कार्यक्रम, फिर भी प्रक्रिया अधूरी

बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत शिक्षा विभाग ने अब तक कई बार प्रक्रिया का कार्यक्रम जारी किया है. जुलाई 2026 में नियमावली अधिसूचित होने के बाद शुरुआती कार्यक्रम बनाया गया था. उसमें 29 जुलाई से आवेदन और सितंबर में सामान्य तबादले की प्रक्रिया पूरी करने की योजना थी.

बाद में राज्य के कुछ जिलों में बाढ़ की वजह से पहले चरण का काम प्रभावित होने की बात कही गई. इसके बाद विभाग ने 4 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच सामान्य तबादले के लिए आवेदन लेने का नया कार्यक्रम तय किया. लेकिन चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ प्रक्रिया फिर रुक गई.

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पिछले विधानसभा चुनाव से पहले भी अटकी थी प्रक्रिया

बिहार में सरकारी शिक्षकों के तबादले के लिए 7 अक्टूबर 2024 को ऑनलाइन व्यवस्था से जुड़ी नीति लाई गई थी. विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भी शिक्षा विभाग ने तबादले की प्रक्रिया शुरू की थी. उस समय शिक्षकों से 1 से 15 दिसंबर तक ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर आवेदन लिए गए थे. सभी शिक्षक सामान्य रूप से आवेदन नहीं कर सकते थे. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, विधवा या परित्यक्ता होने और गंभीर रूप से पीड़ित होने जैसी श्रेणियों के शिक्षकों को आवेदन की अनुमति थी. सामान्य शिक्षकों के आवेदन स्वीकार नहीं किए गए थे. यह प्रक्रिया लंबी चली और विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद रुक गई. जनवरी 2025 में उन शिक्षकों को स्कूल आवंटित किए गए, जिन्हें चुनाव की घोषणा से पहले जिला मिल चुका था. उस चरण में करीब 83 हजार शिक्षकों को उनकी पसंद के स्कूलों में भेजा गया था. इनमें कुछ शिक्षक पहले अपने घर से 300 से 400 किलोमीटर दूर तक तैनात थे. उदाहरण के तौर पर किशनगंज के शिक्षक की पोस्टिंग बेतिया के स्कूल में होने की स्थिति भी सामने आई थी.

सरप्लस शिक्षक का मतलब क्या है?

सरप्लस शिक्षक का अर्थ यह नहीं है कि उनकी जरूरत नहीं है. इसका मतलब है कि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या और तय मानक के हिसाब से जितने शिक्षक चाहिए, वहां उससे ज्यादा शिक्षक तैनात हैं. कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में शिक्षक कम हैं. ऐसे में अतिरिक्त शिक्षकों को जरूरत वाले स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया को रेशनलाइजेशन कहा जाता है. इसका उद्देश्य स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना है. इसे एक उदाहरण से समझिए. अगर किसी स्कूल में पांच शिक्षकों की जरूरत है, लेकिन वहां आठ शिक्षक तैनात हैं, तो तीन शिक्षक सरप्लस माने जा सकते हैं. वहीं, किसी दूसरे स्कूल में छह शिक्षकों की जरूरत होने के बावजूद केवल तीन शिक्षक हैं, तो अतिरिक्त शिक्षकों को वहां भेजकर कमी दूर करने की कोशिश की जा सकती है.

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अब शिक्षकों की नजर नवंबर पर

फिलहाल शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया कई चरणों में अटकी हुई है. करीब 42 हजार शिक्षकों को नई पोस्टिंग मिल चुकी है, जबकि हजारों आवेदन करने वाले शिक्षक अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं. अगर जिला और प्रमंडल स्तर पर लंबित काम समय पर पूरा होता है, तो 7 नवंबर से सामान्य तबादले के लिए आवेदन शुरू होने की संभावना है. अंतिम तारीख और आगे की प्रक्रिया शिक्षा विभाग की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी.