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दीपक प्रकाश अब MLC बन चुके हैं, मामला खत्म किया जाए: सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार

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सुप्रीम कोर्ट में बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की मंत्री पद पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान बिहार सरकार ने कहा कि अब यह विवाद समाप्त हो चुका है, क्योंकि दीपक प्रकाश को विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत किया जा चुका है और उन्होंने शपथ भी ले ली है.

बिहार सरकार की दलील

बिहार सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दीपक प्रकाश अब विधान परिषद के सदस्य हैं. संविधान के अनुसार, विधायक या विधान पार्षद बनने के बाद उनके मंत्री बने रहने में कोई कानूनी बाधा नहीं है. इसलिए इस मामले को अब बंद कर दिया जाना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार की दलील को रिकॉर्ड पर लिया. अदालत ने दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाए जाने से संबंधित अधिसूचना (नोटिफिकेशन) पेश करने को कहा. मामले की आगे सुनवाई में इस पहलू पर विचार किया जाएगा.

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याचिका में क्या कहा गया है?

याचिकाकर्ता ने दीपक प्रकाश की दोबारा मंत्री नियुक्ति को संविधान के खिलाफ बताया है. याचिका के मुताबिक, दीपक प्रकाश 20 नवंबर 2025 को मंत्री बनाए गए थे. उस समय वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं थे. संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत कोई गैर-विधायक अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है. यह अवधि 20 मई 2026 को समाप्त हो गई थी. इसके बाद उन्हें दोबारा मंत्री बनाकर संवैधानिक प्रावधानों को दरकिनार करने की कोशिश की गई.

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याचिकाकर्ता ने किया विरोध

बिहार सरकार द्वारा मामला बंद करने की मांग का याचिकाकर्ता ने विरोध किया. उसका कहना है कि मूल सवाल दीपक प्रकाश के MLC बनने का नहीं, बल्कि छह महीने की अवधि समाप्त होने के बाद उनकी दोबारा नियुक्ति की वैधता का है. इसलिए मामले में संवैधानिक मुद्दे पर फैसला जरूरी है.

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दीपक प्रकाश को नोटिस जारी किया था. उनसे इस मामले में जवाब मांगा गया था. अब अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या छह महीने की संवैधानिक अवधि पूरी होने के बाद किसी व्यक्ति को दोबारा मंत्री बनाकर पद पर बनाए रखा जा सकता है, या यह संविधान की भावना के विपरीत होगा.

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