बिहार में चीनी मिलों के लिए निवेशकों का जोश हाई, कई जिलों के लिए मिले प्रस्ताव

लगता है अब बिहार में चीनी मिलों के अच्छे दिन आने वाले हैं। राज्य की बंद चीनी मिलों के अलावा नई मिलें खोलने में निवेशक रूचि दिखाने लगे हैं। हाल ही में सरकार ने राज्य की नौ बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन निवेशकों को सौंपने का फैसला किया था। अब राज्य में नई चीनी मिल खोलने और बंद मिलों को चलाने के लिए निवेशकों ने रुचि दिखाना शुरू कर दिया है। ऐसे 12 निवेशकों के प्रस्ताव गन्ना उद्योग विभाग को मिले हैं। गन्ना उद्योग विभाग इन निवेशकों के आवेदनों की स्क्रूटिनी कर रहा है। इन्हें निवेश प्रोत्साहन पर्षद की मंजूरी के लिए भी भेजा जाएगा। निवेशक क्षेत्र भ्रमण करने के बाद मनपसंद जगह पर चीनी मिल खोलने का प्रस्ताव दे रहे हैं।
गन्ना उद्योग विभाग ने संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी को जमीन चयन करने में मदद करने के निर्देश दिए हैं। ये निवेशक महाराष्ट्र, कर्नाटक, बंगाल, उत्तर प्रदेश के साथ बिहार के भी हैं। बिहार में पहले से मिल का संचालन करने वाली कंपनियों ने भी मनपसंद जगह पर नई मिल खोलने का प्रस्ताव दिया है। अभी जिन जगहों के लिए प्रस्ताव आया है, उनमें नवादा के वारिसलीगंज, सारण, सीवान, मोतीपुर, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया जिले शामिल हैं। मोतीपुर में बंद मिल का संचालन होगा।


चीनी मिलों को चालू करने का प्लान
आपको बता दें कि बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने राज्य की 9 चीनी मिलों को दोबारा खोलने का फैसला किया है। सकरी और रैयाम इन दो मिलों का संचालन सहकारिता विभाग करेगा। इसी के साथ अन्य चीनी मिलों को चलाने के लिए सरकार ने निवेशकों से प्रस्ताव मांगा था। राज्य सरकार की योजना है कि पहले चरण में मधुबनी जिले की सकरी, दरभंगा जिले के रैयाम और गोपालगंज जिल की सासामूसा चीनी मिल को चालू किया जाए।

चीनों मिलों के लिए उठाए गए कदम सराहनीय- पूर्व मंत्री
इधर पूर्व मंत्री और बिहार राज्य सवर्ण आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने सरकार द्वारा चीनी मिलों के पुनरुद्धार और नई चीनी मिलों की स्थापना के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बिहार के औद्योगिक विकास, किसानों की समृद्धि और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। पूर्व मंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व से देश में एथेनॉल उत्पादन, कृषि आधारित उद्योगों के विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की जो नीति अपनाई गई है, उसका सकारात्मक प्रभाव आज बिहार में स्पष्ट दिखाई दे रह है। उन्होंने कह कि सीएम सम्राट चौधरी के नेतृत्व मं बिहार सरकार ने वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने का जो साहसिक निर्णय लिया है, वह राज्य के औद्योगिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।




