हैलो, मैं ED का डायरेक्टर बोल रहा हूं! जज बनकर DGP को हड़काने वाले अभिषेक अग्रवाल ने इस बार भोजपुर DM को किया कॉल

बिहार में जालसाजी का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जो बड़े-बड़े अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने में माहिर है। खुद को कभी हाईकोर्ट का जज तो कभी केंद्रीय एजेंसी का शीर्ष अधिकारी बताने वाले अभिषेक अग्रवाल को एक बार फिर पुलिस ने दबोच लिया। इस बार उसने भोजपुर के जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया को ED का निदेशक बनकर फोन किया था। हालांकि, तनय सुल्तानिया ने ये नहीं बताया कि आखिर उन्हें किस काम के लिए अभिषेक ने कॉल किया था। एसटीएफ और पटना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे कोतवाली थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। ये वही शख्स है जिसने कुछ साल पहले एक दागी आईपीएस अधिकारी को बचाने के लिए बिहार के तत्कालीन डीजीपी तक को चीफ जस्टिस बनकर ‘ऑर्डर’ दे डाला था।
भोजपुर डीएम को ED निदेशक बन किया कॉल
मामले का खुलासा तब हुआ जब 27 अप्रैल को भोजपुर डीएम के सरकारी मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को नई दिल्ली ED का निदेशक बताया और पद का रौब दिखाते हुए डीएम को परेशान करना शुरू कर दिया। शक होने पर डीएम की गोपनीय प्रशाखा के लिपिक ने भोजपुर के नवादा थाने में 28 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज कराई। भोजपुर एसपी राज के निर्देश पर पुलिस और एसटीएफ ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए आरोपी की लोकेशन ट्रेस की और उसे पटना के नागेश्वर कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया।

जालसाज अभिषेक अग्रवाल की कुंडली
अभिषेक अग्रवाल उर्फ अभिषेक भोपालका का इतिहासधोखाधड़ी और हाई-प्रोफाइल जालसाजी से भरा रहा है। उसके आपराधिक रिकॉर्ड भी चौंकाने वाले हैं। खास बात ये कि अभिषेक के बिहार कई नामचीन आईएएस-आईपीएस के साथ कैजुअल तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर मौजूद हैं।

- 2022 में इसने जज बनकर तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को फोन किया था ताकि भ्रष्टाचार में फंसे IPS आदित्य कुमार को बचाया जा सके।
- आर्थिक अपराध शाखा (EOU) ने इसे पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम पर ठगी करने के मामले में पहले भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
- अभिषेक अग्रवाल पर पटना और भोजपुर के विभिन्न थानों में रंगदारी, धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत तीन गंभीर मामले दर्ज हैं।
- अक्सर खुद को अभिषेक अग्रवाल नई दिल्ली में तैनात बड़े संवैधानिक पदों पर बैठा बताकर अधिकारियों पर दबाव बनाता था।

तकनीकी अनुसंधान से खुला राज
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि आरोपी नागेश्वर कॉलोनी के अजय निलायन अपार्टमेंट का निवासी है। वो लगातार वीआईपी नंबरों या तकनीकी बदलावों के जरिए अधिकारियों को झांसे में लेता था। एसटीएफ ने बताया कि आरोपी केवल डराने के लिए फोन नहीं करता था, बल्कि इसके पीछे उसका मकसद प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित करना और अपना प्रभाव जमाना होता था। भोजपुर पुलिस ने उसके पास से मोबाइल और अन्य संदिग्ध डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।

भ्रष्टाचार के खेल में पुरानी मिलीभगत
अभिषेक के बारे में चौंकाने वाला तथ्य ये है कि वह रसूखदार अधिकारियों के संपर्क में रहता था। पिछली बार उसने जिस आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार को बचाने के लिए जाल बिछाया था, उससे जुड़े तार खंगाले गए थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस बार भी वो किसी खास फाइल को दबवाने या किसी अधिकारी को बचाने के लिए ED डायरेक्टर का मुखौटा पहनकर भोजपुर डीएम तनय सुल्तानिया को कॉल कर रहा था। फिलहाल, पुलिस उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी कर रही है।

