मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी के निशाने पर हैं. सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सीएम पर बेहद ही तल्ख लहजे में हमला बोला. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के अंदर कभी इतनी हिम्मत नहीं रही कि वह चुनौतियों का सामना कर पाए. जब भी कठिन क्षण आया, उन्होंने अपना रास्ता बदल लिया.
नीतीश पर शिवानंद का हमला:
शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक हैंडल पर लिखा, ‘नीतीश जी कभी सीधे खड़े होकर किसी चुनौती का सामना करने वाले नेता नहीं बन पाए. उनके भीतर वह हिम्मत नहीं दिखती, जो बड़े निर्णयों के समय आदमी को अकेले खड़े रहने की ताकत देती है.’
अपने संकल्प भूल गए नीतीश:
पूर्व राज्यसभा सांसद ने याद दिलाते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार की सरकार बनी थी तो उन्होंने दो बड़े संकल्प लिए थे. ‘बिहार में भूमि सुधार लागू करेंगे’ और ‘सभी बच्चों के लिए समान शिक्षा की व्यवस्था करेंगे’. ये दोनों संकल्प सामाजिक परिवर्तन के बड़े एजेंडा थे लेकिन इनको पूरा करने के लिए जिस राजनीतिक दृढ़ता, संगठन और टकराव की तैयारी चाहिए थी, उसका अभाव साफ दिखाई दिया. परिणाम यह हुआ कि दोनों ही मुद्दे धीरे-धीरे फाइलों और समितियों में दबकर रह गए.
‘आरएसएस मुक्त भारत’ का क्या हुआ?:
शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार के भीतर बीच-बीच में ‘समाजवादी’ भी जागता था. गांधी, लोहिया, जयप्रकाश और कर्पूरी ठाकुर की परंपरा का असर भी दिखता था. कभी वे विधानसभा में ‘आरएसएस मुक्त भारत’ की बात करते थे. कभी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ देशभर में घूमकर महागठबंधन बनाने की पहल करते थे. उस समय लगता था कि उनके भीतर की वैचारिकता अभी जीवित है.
‘बीजेपी को सत्ता सौंपने जा रहे हैं..’:
शिवानंद कहते हैं कि आज वही व्यक्ति उसी भारतीय जनता पार्टी को बिहार की सत्ता सौंपने जा रहा है, जिसके खिलाफ वह एक समय देशव्यापी एकता खड़ा करने का अभियान चला रहा था. यह महज राजनीतिक बदलाव नहीं है बल्कि नीतीश कुमार का वैचारिक आत्मसमर्पण है. वह आगे कहते हैं,’नीतीश कुमार के साथ मेरा जो लंबा अनुभव है, उस आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि उनके व्यक्तित्व में रीढ़ का अभाव है. जिस व्यक्ति में रीढ़ नहीं होती, वह कभी सीधा खड़ा नहीं हो सकता. वह हर कठिन क्षण में रास्ता बदलता है, टकराव से बचता है और अंततः समझौते को ही अपनी रणनीति बना लेता है.
‘सीधे टकराने की हिम्मत नहीं’:
पूर्व सांसद ने नीतीश कुमार पर हमला जारी रखते हुए लिखा, ‘ऐसे व्यक्तित्व में एक और प्रवृत्ति अक्सर दिखाई देती है, कायरता. जिसमें एक प्रकार की क्रूरता भी छिपी रहती है. जो सीधे टकराने की हिम्मत नहीं करता, वह अक्सर पीछे से वार करता है. अपने अधिकार और पद का इस्तेमाल करके असहमति रखने वालों को किनारे करता है.’
‘धोखा’ देने का भी लगाया आरोप:
शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार पर जॉर्ज फर्नांडिस, शरद यादव और दिग्विजय सिंह को धोखा देने और रास्ते से हटाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने लिखा, ‘जॉर्ज साहब, शरद यादव या दिग्विजय सिंह की कहानी याद कीजिए. जिन लोगों ने नीतीश कुमार को गढ़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उनके साथ नीतीश कुमार ने क्या व्यवहार किया? एक समय नीतीश कुमार किन लोगों के साथ राजनीति कर रहे थे और आज उनके अगल-बगल कौन लोग दिख रहे हैं? यह केवल साथियों का बदलाव नहीं है, यह नीतीश कुमार के राजनीति के स्तर और दिशा का भी पतन है.’
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