Bihar

बिहार के स्कूलों में डेढ़ लाख टैब लेकिन हाजिरी नील बटे सन्नाटा, सरकारी पैसों की बर्बादी क्यों

बिहार के विद्यालयों में डिजिटल इंडिया के अभियान के बेसिक में ही पलीता लगा हुआ है। राज्य के कुछ स्कूलों को छोड़ बाकी सभी में अटेंडेंस बनाने के लिए सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर टैब की व्यवस्था की। लेकिन हाल ये है कि अटेंडेंस लगाने में गुरुजी और छात्र दोनों ही पीछे हैं। एक करोड़ से ज्यादा छात्र और 5 लाख से ज्यादा टीचरों की टैब से हाजिरी नहीं बन रही।

स्कूलों में टैब मौजूद लेकिन हाजिरी नहीं

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए टैब से हाजिरी बनाने का नियम लाया गया था। फरवरी 2026 में ही आदेश जारी किया गया था कि सभी टीचर और छात्रों की टैब से हाजिरी बनानी जरूरी है। लेकिन अटेंडेंस के मामले में ताजा हाल ये है कि कुल 76 हजार स्कूलों के सभी 1.75 करोड़ बच्चों और 5 लाख 96 हजार टीचरों की हाजिरी टैब से नहीं बन पा रही है। अप्रैल में नया सेशन शुरू हो जाने के बाद भी शिक्षा विभाग का आदेश हांफ रहा है।

क्यों नहीं बन रही टैब से हाजिरी

बिहार के स्कूलों में टैब से हाजिरी नहीं बनने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लेकिन दो से तीन कारण ज्यादा अहम हो गए हैं। इसमें सबसे बड़ी वजह ये है कि स्कूलों में छात्रों का जितना अटेंडेंस बताया जा रहा है, असल में उतना है नहीं। दूसरा बड़ा कारण ये है कि कई टीचर टैब को ऑपरेट ही नहीं कर पा रहे हैं। ज्यादातर स्कूलों में कम्प्यूटर टीचर भी नहीं हैं। ऐसे में हाल ये है कि हाथ में टैब तो है लेकिन अटेंडेंस बनाना मुश्किल साबित हो रहा है। तीसरा कारण ये भी माना जा रहा है कि बगैर स्कूल पहुंचे मोबाइल से फोटो खींच हाजिर बन सकती है, लेकिन टैब से अटेंडेंस के लिए जियोटैगिंग यानी स्कूल में होना जरूरी है।

बिहार के अधिकांश स्कूलों में दिए जा चुके टैब

बिहार के करीब 97 प्रतिशत स्कूलों में अटेंडेंस बनाने के लिए टैब दिए जा चुके हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए 76116 प्राइमरी, मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में टैब देने के टार्गेट तय किया गया था। शिक्षा विभाग ने इसमें से 75,640 स्कूलों में टैब बांट दिए। कुल 1,55,417 टैब स्कूलों में बांटे गए। ऐसा नहीं कि स्कूलों में एक ही टैब दिया गया। हर स्कूल को दो-दो टैब मिले हैं। जहां ज्यादा बच्चों का एडमिशन है, वहां तो एक ही स्कूल में 3 टैब दिए गए हैं। पिछले दिसंबर और जनवरी में ही सभी शिक्षकों को इसके लिए ट्रेनिंग भी दिला दी गई थी।

Avinash Roy

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