Bihar

दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन, 96 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

बिहार से एक दुखद खबर सामने आई है. दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया है. वो करीब 96 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं. सोमवार को उन्होंने अपने राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली. उनके निधन से दरभंगा समेत पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर है.

महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के प्रसिद्ध महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं. दोनों की शादी 1940 के दशक में हुआ था. महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली दो पत्नियां महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया पहले ही इस दुनिया से विदा ले चुकी थीं. ऐसे में कामसुंदरी देवी राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य थीं.

दान करने में आगे

महारानी कामसुंदरी देवी सामाजिक और परोपकारी कामों के लिए जानी जाती थीं. उन्होंने अपने पति महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति में “महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” की स्थापना की थी. इस फाउंडेशन के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कई काम किए जाते रहे हैं.

परिवार में कौन-कौन?

महाराजा कामेश्वर सिंह ने 3 शादियां की थीं. उनकी एक पत्नी महारानी कामेश कामलेश्वरी प्रिया देवी थीं, जिनका निधन वर्ष 1940 में हो गया था. हालांकि महाराजा कामेश्वर सिंह के कोई बेटा या बेटी नहीं थी.साल 1962 में बनाई गई अपनी वसीयत में उन्होंने पंडित लक्ष्मीकांत झा को वसीयत का कार्यपालक नियुक्त किया था. इसके बाद उनकी संपत्ति को लेकर करीब 30 चचेरे भाइयों के बीच विवाद शुरू हो गया. इनमें कुमुद सिंह और कुमार कपिलेश्वर सिंह जैसे नाम शामिल हैं, जो आज भी पुराने किलों और ऐतिहासिक धरोहरों की देखरेख कर रहे हैं. महाराजा की एक बहन थीं. जिनका नाम लक्ष्मी दाईजी था. महाराजा कामेश्वर सिंह के एक भाई भी थे-महाराज कुमार विश्वेश्वर सिंह बहादुर, जिनका जन्म 1908 में हुआ था. उन्हें साल 1938 में राजनगर की जागीर और पेंशन दी गई थी. वे विवाहित थे और उनके तीन बेटे थे.

दरभंगा महराज का इलाका

बता दें कि दरभंगा राज बिहार के मिथिला इलाके की एक बहुत बड़ी और अमीर जमींदारी थी. इस पर खंडवाला वंश के मैथिल ब्राह्मणों का शासन था. इस राज परिवार की शुरुआत महेश ठाकुर से मानी जाती है. मुगल बादशाह अकबर ने लगभग 1557 से 1577 के बीच उन्हें तिरहुत क्षेत्र में जमीन दी थी. अंग्रेजों के समय तक इस जमींदारी में हजारों गांव और करीब 2,400 वर्ग मील का इलाका शामिल हो गया था.

कहां थी राजधानी?

1762 के बाद दरभंगा को राजधानी बनाया गया. बाद में राजनगर (मधुबनी जिला) भी सत्ता का एक बड़ा केंद्र रहा. इस परिवार ने नेपाल से होने वाले हमलों से इलाके की रक्षा की और जमीन खरीदकर अपने राज को और फैलाया.

कौन थे आखिरी राजा?

महाराजा कामेश्वर सिंह बहादुर दरभंगा के आखिरी राजा थे. उन्होंने 1929 में शासन संभाला. उनके समय में चीनी मिल जैसी कई फैक्ट्रियां लगीं. साल 1950 में जमींदारी प्रथा खत्म हो गई और दरभंगा राज भी समाप्त हो गया. लेकिन इसके बाद भी महाराजा कामेश्वर सिंह बिहार के विकास में सक्रिय रहे.

Avinash Roy

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