Bihar

बिहार के बाहर मखाना की खेती पर BAU में रिसर्च, सुपर फूड का उत्पादन बढ़ाने पर बोर्ड का फोकस

बिहार समेत पूरे देश में भगवान की पूजा के प्रसाद में मिलने वाला मखाना अब सुपर फूड बन गया है। अब हवाई जहाज, वंदे भारत व राजधानी जैसी ट्रेनों में स्नैक्स के रूप में परोसा जा रहा है। दुनिया भर में इसके बढ़ते इस्तेमाल से इसे ग्लोबल फूड के रूप में स्थापित करने की कवायद है। इसी कड़ी में बिहार जैसी जलवायु से मिलते जुलते राज्यों में भी सुपर फूड का उत्पादन बढ़ाने के लिए उपयुक्त जमीन तलाशी जाएगी। बोर्ड की आगामी बैठक में यह प्रस्ताव आएगा।

राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के सदस्य सह बीएयू के कुलपति डा. दुनिया राम सिंह फरवरी में संभावित राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव देंगे। बीएयू मखाना उत्पादन को सरल और सुलभ बनाने के लिए कई बिंदुओं पर शोध कर रहा है और अब इसका उत्पादन बढ़ाने पर जोर है। मखाना का उत्पादन अभी बिहार सहित कुछ अन्य पड़ोसी राज्यों में हो रहा है। लेकिन सर्वाधिक उत्पादन बिहार में हो रहा है। आंकड़े के अनुसार देश में मखाना के कुल उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत है। मखाना विकास प्राधिकारण के सीईओ सह बीएयू के रिसर्च डायरेक्टर डा. अनिल कुमार सिंह बताते हैं कि मखाना की खेती किसी भी तरह की जमीन पर हो सकती है, बस जरूरत इस बात की है कि वहां पानी रह सके। इसलिए अगर ऐसी जमीन चिह्नित हो जाती है तो वहां योजनाबद्ध तरीके से बेहतर उत्पादन किया जा सकता है।

मखाना उत्पादकों की सुविधा के लिए बीएयू में कई शोध

मखाना का उत्पादन बढ़ाने, हार्वेस्टिंग, प्रोसेसिंग आदि पर बीएयू में कई शोध किए जा रहे हैं जो मखाना उत्पादक किसानों के लिए बेहतरीन टूल्स बनेंगे। मखाना विकास प्राधिकरण और बीएयू, सबौर के माध्यम से यंत्रीकरण, जीआई आधारित प्रमाणीकरण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर, कौशल उन्नयन और संगठित विपणन को बढ़ावा देने एवं उच्च गुणवत्ता पर काम हो रहा है। आने वाले दिनों में पूर्व बिहार, कोसी या सीमांचल के किसी जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित होने वाला है।

10 राज्यों में बीज भेज रहा

बीएयू के डायरेक्टर रिसर्च बताते हैं कि अभी बिहार समेत देश के कुल दस राज्यों में मखाना का बीज बीएयू से भेजा जा रहा है। इन राज्यों में बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिसा, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, उत्तराखंड, जम्मू एवं कश्मीर शामिल है। कुल 100 क्विंटल बीज तैयार किया गया है।

क्या कहते हैं कुलपति

बोर्ड की आगामी बैठक में प्रस्ताव लाएंगे कि जिन राज्यों में बिहार से मिलती जुलती जलवायु है, वहां भी ऐसी जमीन चिह्नित हो जो मखाना की खेती के लिए उपयुक्त है।

– डाॅ. दुनिया राम सिंह, सदस्य राष्ट्रीय मखाना बोर्ड सह कुलपति बीएयू।

Avinash Roy

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