वर्ष 2006 से जारी भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की जद में सूबे में सबसे अधिक कर्मचारी और अधिकारी मुजफ्फरपुर के ही आए हैं। भ्रष्टचार निरोधक एजेंसियों की पैनी नजर के कारण इन 19 वर्षों में मुजफ्फरपुर के सर्वाधिक 213 कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी की सूची में दूसरे नंबर पर किशनगंज है, जहां इन वर्षों में 72 अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। कार्मिक विभाग की मांग पर निगरानी विभाग ने भ्रष्ट कर्मियों अधिकारियों की सूची जारी की है और इन दागी कर्मचारियों व अधिकारियों को किसी तरह का वित्तीय लाभ और प्रोन्नति ने देने की अपील की है।
निगरानी विभाग की संयुक्त सचिव अंजु सिंह की ओर से जारी सूची में मुजफ्फरपुर और किशनगंज के बाद पटना जिला का नंबर आता है। पटना के 24 कर्मचारी और अधिकारी इस अवधि में भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की जद में आए हैं तो वैशाली को इसमें चौथे स्थान मिला है। वैशाली के 19 और नालंदा के 15 कर्मचारियों-अधिकारियों पर कार्रवाई का डंडा चला है।
इसके अलावा सहरसा में 11, कटिहार में चार, बांका में चार, औरंगाबाद व जमुई में तीन-तीन, सारण में नौ, पश्चिम चंपारण में 10, पूर्वी चंपारण में नौ, दरभंगा में नौ, बक्सर में तीन, मुंगेर में दो, भोजपुर में नौ, गोपालगंज में आठ, समस्तीपुर में 14, नवादा में 11, पूर्णिया में पांच, सीवान में चार, कैमूर में तीन, नालंदा में 15, भागलपुर में सात, खगड़िया में पांच, सीतामढ़ी में छह, गयाजी में आठ, बेगूसराय में छह, मधुबनी में पांच, रोहतास में तीन, मधेपुरा में पांच, अररिया में दो, लखीसराय में दो, जहानाबाद में पांच, अरवल में एक व शिवहर में दो कर्मचारी व अधिकारी पर भ्रष्टाचार निरोधक कार्रवाई की गई है।
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