पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि अब समय आ गया है कि इमरजेंसी के समय परिसीमन पर लगे रोक के कलंक को धोना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 2026 तक परिसीमन पर रोक है, लेकिन इसके लिए चुप नहीं रहना चाहिए। यदि परिसीमन होता है तो लोकसभा की सीटें 40 से बढ़कर 60 हो सकती हैं, जिससे अनुसूचित जाति/जनजाति और महिलाओं को भी लाभ मिलेगा। कुशवाहा ने रविवार को गया जी के गांधी मैदान में आयोजित ‘संवैधानिक अधिकार परिसीमन सुधार महारैली’ को संबोधित करते हुए लोकसभा की सीटों का परिसीमन कराये जाने की मांग उठाई।
कुशवाहा ने कॉलेजियम सिस्टम को संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसकी जगह प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से न्यायाधीशों की नियुक्ति होनी चाहिए, जैसे आईएएस और आईपीएस में होता है। उन्होंने इसे ‘काला धब्बा’ करार दिया और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को लंबे समय से उठाती रही है।
महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति को लेकर उन्होंने कहा कि सनातनी समुदाय को उदारता दिखाते हुए प्रबंधन बौद्ध समुदाय को सौंप देना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से एक्ट में संशोधन की मांग की ताकि बौद्ध धर्मावलंबियों को उनका धार्मिक अधिकार मिल सके।
एनडीए सरकार ही विकल्प: कुशवाहा
महागठबंधन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर यह सत्ता में आया तो बिहार की स्थिति 2005 से भी बदतर हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और एनडीए ही सरकार बनाएगा। महारैली में मगध प्रमंडल के अलावा सूबे भर से हजारों लोग शामिल हुए।
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