Bihar

बिहार में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनकर तैयार, उद्घाटन का इंतजार

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कोसी नदी में बाढ़ से निजात दिलाने व 72 घंटे पहले बाढ़ की जानकारी मिलने की उम्मीद पाले चार वर्षों से सपना पूरा नहीं हो सका है. 108 करोड़ की लागत से एशिया का दूसरा सबसे बड़ा फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनकर तैयार हो गया है. उद्घाटन का मात्र इंतजार है. उद्घाटन के बाद यहां नदी के प्रवाह में हुए बदलाव की स्टडी की जाएगी.

पहले कोसी के जल को रिसर्च करने के लिए पुणे भेजा जाता था. जिससे नदी के प्रवाह का अध्ययन कर उसके प्रकृति में बदलाव लाया जा सकता है. प्रवाह की दिशा में बदलाव लाकर तटबंध पर होने वाले दबाव को कम किया जा सकता है. कोसी नदी की सबसे बड़ी समस्या गाद और बालू की है. फिजिकल मॉडलिंग सेन्टर के नियमित कार्य शुरू होने के बाद जहां एक ओर उत्तर और पूर्वी भारत के विभिन्न नदियों का पानी की स्टडी की जाएगी. वहीं कोसी में निकलने वाले बालू की समस्या पर भी शोध किया जाएगा.

26 अगस्त 2020 को सीएम ने किया था शिलान्यास

सीएम नीतीश कुमार ने लगभग चार साल पूर्व 26 अगस्त 2020 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फिजिकल मॉडलिंग सेंट्रल का शिलान्यास किया था. इसके 15 दिन बाद तत्कालीन जल संसाधन मंत्री संजय झा ने 10 सितंबर 2020 को विधि पूर्वक इसका भूमिपूजन किया था.

चेवरॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा किया गया कार्य

फिजिकल मॉडलिंग सेंटर की निर्माण कंपनी चेवरॉक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एमडी पवन कुमार सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य को तीन माह पहले ही पूरा कर लिया गया हैं. उद्घाटन की तिथि का निर्धारण अब तक नहीं हुआ हैं. विभागीय मानक और कार्य की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया गया हैं. निर्माण के दौरान विभाग के स्थानीय अभियंताओं ने समय समय पर निरीक्षण किया हैं. वहीं जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव और मंत्री भी कार्य का निरीक्षण करते रहे हैं.

पुणे का रिसर्च सेंटर एशिया में सबसे बड़ा

कोसी नदी के अलावा महानंदा, गंडक आदि नदियों में जहां जल प्रलय और सिल्ट की समस्या है, उन नदियों में पानी के दबाव के आधार पर काम किया जाएगा ताकि नुकसान कम हो सके। जानकारी के अनुसार सीडब्लूपीआरएस (सेंट्रल वाटर पावर रिसर्च स्टेशन) पुणे की तर्ज पर यह मॉडलिंग रिसर्च सेंटर पूर्वी भारत का सबसे बड़ा रिसर्च सेंटर होगा। पहले कोसी नदी के पानी को पुणे रिसर्च के लिए ले भेजा जाता था। अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी.

कहते हैं चीफ इंजीनियर

जल निःसंरण एवं बाढ़ नियंत्रण के चीफ इंजीनियर मनोज रमन ने बताया कि क्षेत्र और विभाग के लिए अति महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट फिजिकल मॉडलिंग सेंटर का ढांचा पूरी तरह बनकर तैयार हो गया हैं. रिसर्च सेंटर हैं इसलिए आंतरिक संसाधन भी जरूरी है. संसाधन अभी पूरी तरह नहीं लगे हैं.

Avinash Roy

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