Bihar

एक अयोध्या यहां भी; सरयू नहाकर लौट रहे साधु-संतों ने बेगूसराय में रखा था गंगा किनारे बसे गांव का नया नाम…

यहां क्लिक कर हमसे व्हाट्सएप पर जुड़े 

उत्तर प्रदेश में भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या सरयू नदी के किनारे बसा है तो बेगूसराय का अयोध्या गंगा नदी के तट पर बसा है। तेघड़ा अनुमंडल के अयोध्या गांव का भी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व कम नहीं है। यूपी के अयोध्या में राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को हो रही है। इसको लेकर तेघड़ा नगर परिषद क्षेत्र में बसे छोटे से गांव अयोध्या में भी लोगों का उत्साह चरम पर है। मुगलकाल से ही अस्तित्व में आया यह गांव धीरे-धीरे धार्मिक महत्ता को लेकर बढ़ने लगा।

गांव के नामकरण को लेकर लोगों में अलग-अलग राय है। बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि गंगा किनारे स्थित होने के कारण यात्रा के लिए गंगा नदी का जलमार्ग सुलभ और सुगम था। कहा जाता है कि मुगलकाल में मिर्जा और पैगंबर नाम के दो भाइयों के बीच बंटवारे में दोनों को आधा-आधा हिस्सा मिलने के बाद गांव का नाम अद्धा रखा गया। कालांतर में इसे अज के नाम से जाना जाने लगा। अज भगवान राम के पितामह थे। बुजुर्ग लोगों ने बताया कि आधा-आधा हिस्सा मिलने के कारण अयोध्या के बगल में आधारपुर गांव है और पैगंबर को आधा हिस्सा मिलने से पैगंबरपुर नाम की बस्ती भी अयोध्या गांव के पास ही है।

भगवान राम के पितामह अज के नाम पर गांव का नाम आगे अजधा बुलाया जाने लगा। अंग्रेजों के समय में अयोध्या से लौट रहे साधु-संतों की एक टोली गंगा के रास्ते ही आ रही थी। यह टोली गांव में रुकी। गांव वालों ने जब बताया कि गांव का नाम अजधा है तो साधु-संतों ने नाम अजधा से बदल कर अयोध्या करने की अपील की। संतों ने ग्रामीणों से कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या सरयू नदी के किनारे है। पवित्र गंगा नदी के किनारे भगवान राम के पितामह के नाम से जुड़े इस गांव का नाम अयोध्या ही होना चाहिए। बताया जाता है कि उस दिन के बाद लोगों ने गांव का नाम अयोध्या कर दिया। उन साधु-संतों ने यहां एक ठाकुरबाड़ी का भी निर्माण कराया था जो आज भी मौजूद है।

अंग्रेजों के समय में यहां थी नील की कोठी

बुजुर्ग भोला प्रसाद सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक कमलेश्वरी प्रसाद सिंह, केदार सिंह, राजीव रंजन सिंह, अनिल सिंह, चन्द्रभूषण सिंह आदि ने बताया कि सदियों से गांव से मात्र दो-ढ़ाई किलोमीटर की दूरी पर गंगा बहती रही हैं। इसलिए अंग्रेजों द्वारा गांव में ही नील की कोठी का निर्माण कराया गया था। अंग्रेजी हुकूमत में गंगा के रास्ते ही माल ढुलाई होती थी। राजा-राजवाड़े और सैनिक भी यात्रा करते थे। गंगा किनारे बसे होने की वजह से यह सुरक्षित और सुगम जगह थी।

गंगा घाट के रूप में विकसित हो रहा है बेगूसराय का अयोध्या

अयोध्या गांव अब गंगा घाट के रूप में विकसित हो रहा है। गंगा नदी से सड़क की दूरी कम होने के कारण अंग्रेजों के समय से मिथिला के लोगों का यहां आना-जाना रहा है। अयोध्या घाट को लेकर सक्रिय रहने वाले विकास कुमार ने बताया कि अधिकतर लोग गंगा स्नान, पूजा-पाठ और शवयात्रा के लिए अयोध्या पहुंचते हैं। राज्यसभा के सांसद राकेश सिन्हा ने यहां घाट के सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव रखा है। ग्रामीणों का कहना है कि घाट पर सीढ़ी निर्माण और सौंदर्यीकरण से आने वाले समय में अयोध्या की महत्ता और बढ़ेगी।

Avinash Roy

Recent Posts

जाली टिकट के साथ यात्रा कर रहे चार यात्री पकड़े गए, दो पर समस्तीपुर GRP थाना में प्राथमिकी दर्ज

समस्तीपुर : जाली रेलवे टिकट के साथ यात्रा करने के मामले में रेल थाना (GRP)…

33 मिनट ago

फर्जी शिक्षक नियुक्ति मामले में प्रधानाध्यापिका व कथित शिक्षक पर FIR, वेतन भुगतान की साजिश का आरोप

समस्तीपुर/सरायरंजन : समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड के नौआचक पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय, नौआचक वार्ड…

2 घंटे ago

विश्वविद्यालय परिसर में हुए चर्चित एसिड ब्लास्ट कांड की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग

समस्तीपुर/पूसा : डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा परिसर में हुए चर्चित एसिड ब्लास्ट…

2 घंटे ago

कर्पूरीग्राम के लोगों के लिए खुशखबरी, अब यहां भी रूकेगी बिहार संपर्क क्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन

समस्तीपुर : उत्तर बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है. दिल्ली जाने वाली…

2 घंटे ago

डॉली और उसके पहले पति पर ह’त्या का मामला दर्ज, महिला हिरासत में

समस्तीपुर : प्रेम-प्रसंग से जुड़े मामले में सूरज सोनी की संदिग्ध मौत को लेकर मृतक…

4 घंटे ago

समस्तीपुर मुफस्सिल थाना परिसर में 6 हजार 383 लीटर शराब का किया गया विनष्टीकरण

समस्तीपुर : मुफस्सिल थाना परिसर में बुधवार को विभिन्न मामलों में जब्त अवैध शराब को…

13 घंटे ago