बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के दोनों सीनियर दलों के नेता लालू यादव व तेजस्वी और नीतीश कुमार के बीच तनाव की अटकलों के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) पूरी तरह डैमेज कंट्रोल मोड में दिख रही है। आरजेडी के नेता अब कहने लगे हैं कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इंडिया गठबंधन का संयोजक बनाना चाहिए। डैमेज कंट्रोल की जरूरत इसलिए आई है क्योंकि पटना में राहुल गांधी को दूल्हा बताने वाले लालू यादव गठबंधन की चौथी मीटिंग में नीतीश का नाम बढ़ाने में नाकाम रहे। वो भी तब जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का नाम प्रधानमंत्री कैंडिडेट के लिए रख दिया।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अध्यक्ष ममता बनर्जी अंत में बोलने वाले वक्ताओं में शामिल थीं इसलिए खरगे को लेकर उनके प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हुई लेकिन आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल समेत 12 पार्टियों के नेता दलित पीएम कैंडिडेट के आयडिया के पक्ष में दिखे। लालू ने ममता से पहले भाषण किया लेकिन वो संयोजक या पीएम कैंडिडेट के लिए नीतीश का नाम लेकर एजेंडा सेट करने से चूक गए। ये बात जेडीयू को पसंद नहीं आई। उस मीटिंग का असर पटना में अभी तक दिख रहा है। गाहे-बगाहे लालू के घर जाने वाले नीतीश नए साल में औपचारिकता पूरी करने भी नहीं गए। ललन सिंह की छुट्टी में भी इस प्रकरण का योगदाना माना जाता है।
अफवाह और अटकल तो क्या-क्या नहीं लगे। दिल्ली में जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के समय तो यहां तक कह दिया गया कि जेडीयू वापस बीजेपी की तरफ मुड़ सकती है और बीजेपी के साथ बातचीत भी चल रही है। इस मसले पर दोतरफा खंडन आ चुका है। फिर भी आरजेडी और जेडीयू के रिश्ते में जो ठंडक नवंबर के बाद आई है उसमें गर्माहट अभी तक लौटी नहीं है। नीतीश की कथित नाराजगी के बीच आरजेडी प्रवक्ता और तेजस्वी के करीबी मनोझ झा ने मंगलवार को कहा कि राजद नीतीश कुमार को इंडिया गठबंधन का संयोजक बनाना चाहता है। इसमें राजद को कोई समस्या नहीं है। मनोज झा ने ये भी कहा कि नीतीश से बड़ा नेता देश में कोई नहीं है। महागठबंधन में सब ठीक है और मुख्यमंत्री पर कोई दबाव नहीं है।
मनोज झा के बाद लालू यादव के करीबी और आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा है कि नीतीश कुमार को अगर संयोजक बनाया जाता है तो यह खुशी की बात है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार के नेता को कोई पद मिलता है तो यह बेहद खुशी की बात होगी। हालांकि आरजेडी नेता ने सेफ खेलते हुए जोड़ दिया कि इंडिया गठबंधन का संयोजक कौन बनेगा, ये गठबंधन के नेता ही तय करेंगे।
दरअसल, राजनीतिक गलियारों में ठोस चर्चा है कि लालू चाहते थे कि जेडीयू का आरजेडी में विलय हो जाए जिससे बिहार में एक बड़ी पार्टी का स्वरूप बने और लोकसभा के बाद इंडिया गठबंधन में कांग्रेस के बाद सबसे ज्यादा सांसद उसके पास रहें। नीतीश को विलय शब्द से ही नफरत है। आयडिया फेल हो गया लेकिन मन में खटास पैदा कर गया। लालू की दूसरी चाहत तेजस्वी को जल्दी मुख्यमंत्री बनाने की है। नीतीश कह चुके हैं कि 2025 का चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा इसलिए ये साफ है कि वो 2024 या 2025 के चुनाव से पहले कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
तेजस्वी की ताजपोशी और विलय जैसे मसलों ने आरजेडी और जेडीयू के रिश्ते को असामान्य कर दिया है। अक्टूबर तक कभी लालू सीएम आवास जाते थे, तो कभी नीतीश लालू के पास जा रहे थे। सब बंद है। नीतीश कुर्सी को परे रख दें तो उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है। लालू को नीतीश की जरूरत है। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव में भी लालू को आरजेडी के आधार वोट के ऊपर नीतीश के वोट चाहिए। तेजस्वी को सीएम बनाने का लालू का सपना बिना नीतीश के पूरा नहीं हो सकता। लालू ये बात समझ रहे हैं इसलिए जब नीतीश जेडीयू अध्यक्ष बने तो तेजस्वी ने विदेश दौरा रद्द कर दिया। लालू अब डैमेज कंट्रोल के जरिए नीतीश से संबंध सामान्य करने में जुट गए हैं ताकि तेजस्वी का करियर फिर ना फंस जाए।
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