बिहार के नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने को लेकर नीतीश सरकार कमेटी गठन पर विचार कर रही है। मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही कमेटी गठन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस उच्चस्तरीय कमेटी में शिक्षा, वित्त, पंचायती राज और सामान्य प्रशासन विभाग के आला अधिकारी मुख्य रूप से शामिल होंगे। कमेटी इस बात पर मंथन करेगी कि शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए कौनसी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। साथ ही इसमें कोई कानूनी अड़चन तो नहीं आ रही है। कमेटी की अनुशंसा के बाद राज्य सरकार उस पर अंतिम निर्णय लेगी।
मालूम हो कि अध्यापक नियुक्ति एवं सेवाशर्त नियमावली, 2023 के तहत बिहार लोक सेवा आयोग से शिक्षकों की नियुक्ति के फैसले के बाद से शिक्षक संगठनों की यह मुख्य मांग है कि उन्हें बिना शर्त राज्य कर्मी का दर्जा दिया जाए। इसी संदर्भ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पांच अगस्त को महागठबंधन के घटक दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी।
सीएम नीतीश के सामने घटक दलों के नेताओं ने मांग रखी कि शिक्षकों को बिना शर्त के राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। इस पर सीएम की ओर से कहा गया कि शिक्षकों को बीपीएससी की परीक्षा भले ही न देनी हो, लेकिन उन्हें अन्य किसी तरह की स्क्रीनिंग से जरूर गुजरना पड़ेगा। राज्य में नियोजित शिक्षकों की संख्या चार लाख से अधिक है।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियोजित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने के लिए नए विकल्प पर विचार कर रहे हैं। इसी बाबत हाईलेवल कमेटी का गठन किया जा रहा है। ताकि बाद में फिर से कोई विवाद न उठे और शिक्षकों का गुस्सा भी शांत हो जाए।
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