बिहार के किसी भी नगर निकाय की बैठक में अब राज्यसभा या लोकसभा सांसद और विधान परिषद या विधानसभा सदस्य के प्रतिनिधि शामिल नहीं होंगे। नीतीश सरकार ने यह फैसला लिया है। इन बैठकों में सांसद-विधायक जैसे संबंधित जनप्रतिनिधियों को खुद शामिल होना होगा। उनके स्तर से नियुक्त या प्राधिकृत कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होंगे। इस नियम का पूरी सख्ती से पालन करने का आदेश नगर विकास एवं आवास विभाग ने दिया है।
इसको लेकर विभाग के अपर सचिव ने सभी नगर निगम के नगर आयुक्तों और सभी नगर परिषद या नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों को पत्र लिखा है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नगर निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद के प्रतिनिधि अपनी गाड़ी पर इस तरह के बोर्ड नहीं लगा सकते हैं। यानी अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद के प्रतिनिधि लिखा कोई बोर्ड किसी गाड़ी पर नहीं लगा होना चाहिए।
हालांकि नगर निकायों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षद अपनी गाड़ी पर अपने पदनाम वाला बोर्ड लगा सकते हैं। बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के तहत नियमों का पालन करने के लिए सभी नगर निकाय के अधिकारियों को कहा गया है।
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