Bihar

चाचा की चौकी खतरे में, पशुपति पारस से हाजीपुर लोकसभा सीट छीनने के मूड में हैं चिराग पासवान

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हाजीपुर लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रहे लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के बेटे और जमुई सीट से दूसरी बार सांसद बने चिराग पासवान 2024 के चुनाव में अपने पिता की पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-रामविलास से जुड़े वरिष्ठ नेताओं की मानें तो चिराग ने मन बना लिया है कि इस बार वो बीजेपी से गठबंधन में हाजीपुर की सीट अपने लिए मांगेंगे। इस से एक साथ दो शिकार होगा।

पहला तो पासवान परिवार के लिए सेफ हाजीपुर सीट से चाचा पशुपति पारस की विदाई हो जाएगी और दूसरा पारस किसी और सीट से लड़े तो उनकी हार का खतरा बना रहेगा। बिहार की 40 में छह लोकसभा सीटें अनुसूचित जाति के कैंडिडेट के लिए आरक्षित है जिसमें हाजीपुर और जमुई के अलावा समस्तीपुर, सासाराम, गया और गोपालगंज शामिल है। छह एससी रिजर्व सीटों में तीन पर चिराग के परिवार का ही कब्जा है। जमुई से चिराग खुद सांसद हैं।

हाजीपुर से चिराग के चाचा पशुपति पारस सांसद हैं जिन्होंने पार्टी के 6 में से 5 सांसद तोड़कर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) बना ली और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री भी बन गए। समस्तीपुर से चिराग के चचेरे भाई प्रिंस राज सांसद हैं। बाकी तीन सीटों में एक बीजेपी और दो जेडीयू के पास है।

चिराग की पार्टी और खुद चिराग ने हाजीपुर में गतिविधियां बढ़ा रखी है। न्योता से लेकर कार्यक्रम तक में वो शामिल हो रहे हैं। चिराग की मंशा भांप चुके पशुपति पारस भी चैलेंज कर चुके हैं कि हाजीपुर से चिराग लड़ें या उनकी मां, वो भी हाजीपुर छोड़कर कहीं नहीं जा रहे। दावा और चैलेंज एक तरफ, गठबंधन में लड़ना है तो बीजेपी की भी चिराग और पारस की दावेदारी में भूमिका रहेगी। बीजेपी जिस तरफ झुकेगी उसे हाजीपुर से लड़ने का मौका मिलेगा।

हाजीपुर में अपनी लोकप्रियता के भ्रम में चल रहे पशुपति पारस को जनता के आक्रोश का स्वाद भी मिलने लगा है। सोमवार को रेलवे के एक कार्यक्रम में पारस ने जब वो कहा कि वो हाजीपुर के सेवक हैं तो सभा में मौजूद एक बुजुर्ग आदमी उन पर बरस पड़े। बुजुर्ग ने सरेआम पारस को खरी-खोटी सुनाई और कहा कि चुनाव के समय जनता को मालिक बताकर चुनाव के बाद खुद मालिक बन जाते हो। पारस की इस बुजुर्ग से कुछ देर बहस हुई और फिर पारस वहां से चलते बने। ये वैसे तो एक छिटपुट घटना है लेकिन हाजीपुर के लोगों के मन में पारस को लेकर कितना गुस्सा है, उसका एक संकेत भी है।

कुल मिलाकर हाजीपुर का मन-मिजाज भी चिराग पासवान की संभावना बढ़ा रहा है। अगर पशुपति पारस के खिलाफ गुस्सा है तो बीजेपी किसी भी सूरत में पारस को वहां से दोबारा लड़ने नहीं देगी। चिराग अगर बीजेपी के साथ आते हैं तो एससी वर्ग के लिए आरक्षित हाजीपुर सीट लोजपा-रामविलास के खाते में जाने के आसार ज्यादा हैं। अभी तो चिराग बीजेपी के बगल में खड़े होकर एनडीए से बाहर हवा का रुख भांप रहे हैं।

Avinash Roy

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