मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया के दौर में ऐसा लग रहा है कि सरकार शिक्षा क्षेत्र की लगातार अनदेखी कर रही है, जो हर मायने में इन सभी योजनाओं की बुनियाद है। इसका बड़ा उदाहरण है राजधानी पटना स्थित मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय। इस विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाएं भी पिछले तीन सालों में मुहैया नहीं हो सकी हैं।
किसी भी शैक्षणिक संस्थान की मूलभूत सुविधाओं में बेंच टेबल होती हैैं, लेकिन जब विश्वविद्यालय परिसर में दैनिक जागरण की टीम ने मुआयना किया तो कक्षाओं में टेंट हाउस से लाए गए कुर्सी-टेबल लगी थीे। विवि के अधिकांश कमरों की हालत ऐसी ही दिखी। यह हाल क्लास रूम का ही नहीं बल्कि फैक्लटी के बैठने के लिए भी टेंट हाउस की प्लास्टिक कुर्सी व टेबल रखी हुई थी।
वहीं इस विवि में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की मिली। कई करोड़ रुपये से निर्मित आधुनिक इमारतों वाले इस विवि में स्टाफ व विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था न के सामान है। विवि में एक आरओ हाल के दिनों में लगाया गया है। यह आरओ चार मंजिले इस विवि की एक बिल्डिंग में लगाया गया है। यदि शिक्षक, विद्यार्थी या कर्मचारी अपना पानी लेकर न जाए तो इस तेज गर्मी में प्यासे रहना पड़ सकता है।
कॉलेज कर्मियों की मानें तो सूबे के मुखिया नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक इस विवि में लिफ्ट कई महीनों से बंद पड़ी है। विवि की सभी बिल्डिंग 4 से 5 मंजिल है। हर तल पर अलग-अलग संकाय ओर इनके शिक्षण कक्ष हैं। इसके लिए कॉलेज के विद्यार्थियों व शिक्षकों को सीढ़ी के सहारे चढऩा पड़ता है।
एक ओर जहां केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लागू कर रही है, शिक्षा को स्मार्ट बनाने जा रही है। इसके लिए सभी स्कूल कॉलेजों के क्लास रूम को स्मार्ट क्लास रूम में तब्दील कर रही है। वहीें यह विवि शायद पहला विवि होगा जहां स्मार्ट ब्लैक बोर्ड कौन कहे। सामान्य ब्लैक बोर्ड भी किसी क्लास रूम में नहीं है। जबकि आपको बता दें कि इस विश्वविद्यालय में आठ से अधिक कोर्सेज संचालित हो रहे हैैं।
इस विवि में कार्यरत करीब एक दर्जन नवनियुक्त शिक्षकों को सैलरी नहीं मिली है। शिक्षकों की मानें तो सभी विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए राज्य सरकार की ओर से सैलरी आवंटित कर दी गई है, लेकिन मौलाना मजरूल हक विवि एकमात्र ऐसा विवि है जिसकी राशि पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में शिक्षकों के सामने जीवकोपार्जन की भी समस्या विकराल हो गई है।
मिली जानकारी के अनुसार शिक्षा मंत्री प्रो. चंदशेखर ने 17 दिसंबर 2022 की कार्यवाही में स्पष्ट आदेश दिया था कि बिहार लोक सेवा आयोग और बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के वेतन भुगतान के लिए विश्वविद्यालयों में वेतनादि मद में उपलब्ध आवंटन से भुगतान किया जाए। इसका स्पष्ट लिखित निर्देश शिक्षा विभाग द्वारा जारी दस्तावेज में रेखा कुमारी, निदेशक, उच्च शिक्षा बिहार सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों को वेतन भुगतान हेतु दो फरवरी 2023 को जारी किया है। इसके बाद भी विवि द्वारा शिक्षकों को वेतन नहीं दिया गया।
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