तमिलनाडु में प्रवासी बिहारियों के साथ हिंसा मामले में वायरल वीडियो को लेकर बिहार पुलिस ने नया खुलासा किया है. एक बेहद वायरल वीडियो की शूटिंग पटना के जक्कनपुर थाना स्थित बंगाली टोला स्थित किराये के मकान में हुई थी, जिसमें पट्टी बांधे दो लोगों को दिखाया जा रहा है. इस मामले में इओयू ने वीडियो अपलोड करने वाले राकेश रंजन कुमार, ट्वीट करने वाले यूट्यूबर मनीष कश्यप सहित उनके दो अन्य साथियों के खिलाफ नया मामला दर्ज किया है. वायरल वीडियो मामले में पहले से दर्ज केस (03/2023) में अब तक जमुई के अमन कुमार के अलावा यूट्यूबर राकेश तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं, दूसरे केस (04/2023) में वीडियो अपलोड करने वाले राकेश रंजन को गिरफ्तार किया गया है.
बिहार पुलिस के एडीजी (मुख्यालय) जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि पहले केस में नामजद दो आरोपियों युवराज सिंह राजपूत और मनीष कश्यप को नोटिस देने के बावजूद उपस्थित नहीं होने पर अब उनकी गिरफ्तारी को लेकर न्यायालय से वारंट लेने की कार्रवाई की जा रही है. एडीजी मुख्यालय ने बताया कि बीएनआर न्यूज हनी नामक यूट्यूब चैनल ने एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें दो लोगों को सिर पर पट्टी बांधे दिखाया गया था.
इस वीडियो को पहले कांड के अभियुक्त मनीष कश्यप ने आठ मार्च को ट्वीट किया था. वीडियो संदिग्ध दिखने पर इओयू ने इसकी जांच की. वीडियो अपलोड करने वाले व्यक्ति राकेश रंजन कुमार को गोपालगंज से पूछताछ के लिए लाया गया, जिसमें उसने दो लोगों के सहयोग से यह फर्जी वीडियो बनाये जाने की बात स्वीकार की, ताकि पुलिस द्वारा किये जा रहे अनुसंधान को गलत दिशा में मोड़ा जा सके.
एडीजी ने कहा कि इस कांड के आरोपी यूट्यूबर मनीष कश्यप आदतन अपराधी हैं. इनके विरुद्ध पहले से सात एफआइआर दर्ज हैं. उनके द्वारा पुलिस पर कई बार हमला भी किया जा चुका है. पुलवामा घटना के बाद पटना के ल्हासा मार्केट में कश्मीरी दुकानदारों को पीटने के आरोप में ये जेल भी जा चुके हैं. कांड दर्ज होने के बाद वह फरार हैं. वहीं, अन्य अभियुक्त युवराज सिंह पिछले तीन महीने से नारायणपुर (भोजपुर) के एक गोलीबारी के कांड में यह फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए भी टीम बनायी गयी है.
युवराज सिंह राजपूत के खिलाफ तमिलनाडु के कोयम्बटूर में भी फर्जी वीडियो पोस्ट करने का एक कांड दर्ज है. श्री गंगवार ने बताया कि तमिलनाडु में बिहारियों के साथ कतिपय हिंसा के मामले की जांच को लेकर दस सदस्यीय जांच टीम गठित है. इस टीम ने कुल 30 वीडियो व पोस्ट चिह्नित किये हैं, जिनको लेकर अनुसंधान किया जा रहा है. सत्यापन के दौरान 26 अन्य ट्विटर, फेसबुक, यू-ट्यूब अकाउंट्स को भी चिह्नित किया गया है, जबकि 42 सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए प्रिजर्वेशन नोटिस जारी किया गया है. इनके डिजिटल फुटप्रिंट को तीन महीने तक सुरक्षित रखा जायेगा ताकि सबूत के रूप में उसका इस्तेमाल हो सके.
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