Bihar

नीतीश कुमार को ललकारा, वसुंधरा राजे को संभाला, 4 राज्यों में बदले कप्तान; समझें BJP का प्लान

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भारतीय जनता पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गुरुवार को बड़ा दांव चला और 4 राज्यों के अध्यक्ष बदल दिए। इनमें राजस्थान, बिहार, ओडिशा और दिल्ली शामिल है। खास बात है कि इन राज्यों में गैर भाजपा सरकारें हैं। अब इस ताजा फेरबदल का कनेक्शन आंतरिक राजनीति और जातीय समीकरण से जोड़ा जा रहा है।

पहले समझें फोकस

माना जा रहा है कि राजस्थान और दिल्ली में भाजपा का सबसे खास ध्यान गुटबाजी पर रहा। वहीं, बिहार में पार्टी ने उस जाति से ही एक चेहरा खड़ा किया है, जो पारंपरिक रूप से नीतीश कुमार के लिए मतदान करता था। जबकि, कहा जा रहा है कि ओडिशा में ओबीसी नेता के हाथों में कमान सौंपकर पार्टी ने जनाधार बनाने की कोशिश की है।

चारों राज्यों की कहानी

राजस्थान

राजस्थान में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां पार्टी ने सतीश पूनिया को हटाकर चित्तौरगढ़ सांसद सीपी जोशी को मौका दिया है। पार्टी इसके जरिए राजस्थान इकाई को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। कहा जा रहा है कि ब्राह्मण नेता जोशी पार्टी की प्रदेश इकाई में किसी बड़े नेता या समूह के करीबी नहीं हैं। इसके अलावा राज्य में भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री चेहरा तलाशना भी एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।

पार्टी का एक धड़ा इस बदलाव को संकेत के तौर पर भी देख रहा है कि राज्य में वसुंधरा राजे की अनदेखी नहीं की जा सकती। राजे गुट पूनिया पर नजरअंदाज करने और पूर्व सीएम को अहम फैसलों से दूर रखने का आरोप लगाता रहा है। माना जा रहा है कि राजे को जोशी स्वीकार होंगे। हाल ही में गुलाब चंद कटारिया को भी राजस्थान से हटाकर असम का राज्यपाल बनाया गया है। कहा जाता है कि कटारिया भी राजे विरोधी थे।

दिल्ली

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के एक सांसद वीरेंद्र सचदेव को दिल्ली की कमान सौंपना अच्छा दांव मान रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राज्य में दोबारा जमीन हासिल करने के लिए भाजपा के पास अनुकूल माहौल है और हमारे पास एक अच्छे नेता की कमी थी, जो सभी को साथ रख सके। उम्मीद है कि सचदेव ऐसा करेंगे।’

बिहार

जेडीयू के एनडीए से बाहर जाने और महागठबंधन से हाथ मिलाने पर भाजपा को बड़ा झटका लगा था। अब सम्राट चौधरी के जरिए भाजपा नीतीश के कुर्मी-कोइरी बेस में सेंध लगाने और राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव का सामना करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले प्रदेश की कमान संजय जयसवाल संभाल रहे थे।

ओडिशा

ओडिशा में पार्टी अध्यक्ष के पद पर मनमोहल समल की वापसी हुई है। वह पहले भी यह पद संभाल चुके हैं। हाल ही के धामनगर उपचुनाव में जीता का श्रेय भी उन्हें ही मिला था। ओबीसी नेता समल के जरिए भाजपा राज्य में ओबीसी वोट एकजुट करना चाहती है। आंकड़े बताते हैं कि अनुमानित तौर पर राज्य की 50 प्रतिशत से ज्यादा जनता इस समुदाय से आती है।

Avinash Roy

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