बिहार में नीतीश कैबिनेट का विस्तार खरमास के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच कांग्रेस ने महागठबंधन सरकार में टेंशन पैदा कर दी है। दरअसल, मौजूदा कैबिनेट में कांग्रेस कोटे से दो मंत्री ही हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर नए प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कांग्रेस कोटे से दो और सदस्यों को मंत्रिपरिषद में जगह देने की मांग कर दी है। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव बढ़ गया है।
आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार मकर संक्रांति के बाद अपनी कैबिनेट का विस्तार और फेरबदल कर सकते हैं। मौजूदा कैबिनेट में कुछ मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। साथ ही कुछ नए चेहरे मंत्रिपरिषद में जोड़े जा सकते हैं। पिछले साल अगस्त में महागठबंधन सरकार बनने के बाद से अब तक आरजेडी कोटे के दो मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। उनकी जगह भी भरी जाएगी।
बिहार में कांग्रेस को नया चीफ मिलने के बाद पार्टी ने नीतीश सरकार पर अपना दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। पिछले साल सरकार के गठन के वक्त कांग्रेस कोटे से महज दो विधायकों को मंत्री बनाया गया था। इनमें आफाक आलम को कैबिनेट में जगह मिली तो मुरारी गौतम राज्यमंत्री बने थे। हालांकि, बिहार में कांग्रेस के कुल 19 विधायक हैं। कांग्रेस का कहना है कि विधायकों की संख्या के आधार पर उनकी पार्टी के कम से कम चार मंत्री होने चाहिए।
अगस्त 2022 में सरकार के गठन के वक्त भी कांग्रेस ने 4 मंत्रियों की डिमांड की थी। हालांकि, तब सिर्फ दो कांग्रेस विधायकों को ही मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। अब अखिलेश प्रसाद सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी ने अपनी मांग पुरजोर कर दी है। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद ही अखिलेश ने संकेत दे दिए थे कि वे कैबिनेट में कांग्रेस कोटे के मंत्रियों की संख्या बढ़ाने की कवायद करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी अखिलेश प्रसाद सिंह ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आगमी कैबिनेट विस्तार में कांग्रेस के दो और विधायकों को मंत्री बनाना चाहिए। इस बारे में वे सीएम नीतीश कुमार से भी बात कर चुके हैं।
अगस्त 2022 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जब महागठबंधन की सरकार बनी थी, तब आरजेडी कोटे से तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम बनाया। विधायकों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए उसके सर्वाधिक 16 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, बाद में सुधाकर सिंह और कार्तिक कुमार को विवादों के बाद कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा। इसके अलावा नीतीश की पार्टी जेडीयू से 11, कांग्रेस से 2, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा से 1 और एक निर्दलीय विधायक मंत्री बने। वाम दलों ने सरकार को बाहर से सपोर्ट दे रखा है।
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