Bihar

48 घंटे के भीतर शराबबंदी कानून खत्म करें नीतीश-तेजस्वी, प्रशांत किशोर बोले-BJP को भी जवाब देना चाहिए

सारण (छपरा) में जहरीली शराब से मौत मामले में नीतीश सरकार पर भाजपा हमलावर है और सीएम से इस्तीफा की मांग का रहे हैं. इस बीच जन सुराज यात्रा पर निकले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने शराबबंदी को एक विफल योजना बताते हुए इसे 48 घंटे के भीतर रद्द करने की मांग की. इस दौरान उन्होंने भाजपा, नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव तीनों पर निशाना साधा. और सबको शराबबंदी की विफलता के लिए जिम्मेदार ठहराया. PK ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग खुद शराब पीते हैं.

प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार से शराबबंदी हटाने की मांग करते हुए कहा कि जिसको वोट का डर है वही इस पर टिप्पणी नहीं कर रहा है. शराबबंदी बिहार के हक में नहीं है और ना ही समाज के हक में ही है. इससे बिहार की इकोनॉमी भी प्रभावित हो रही है. प्रशांत किशोर ने कहा कि शराबबंदी पर सबसे पहली मुखर आवाज हमने ही उठाया है. इसके साथ ही प्रशांत ने कहा कि बिहार में जितने भी दल हैं, उन्हें शराबबंदी को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.

प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ-साथ बीजेपी और आरजेडी पर जोरदार हमला बोला है. प्रशांत किशोर ने कहा है कि नीतीश कुमार की जिद के कारण बिहार के लोगों की आज यह दुर्दशा हो रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरजेडी जब सत्ता मिल जाती है तो वे चुप्पी साध लेते हैं और जैसे ही विपक्ष की भूमिका में आते हैं, शराबबंदी को लेकर हायतौबा मचाने लगते हैं.

प्रशांत किशोर ने कहा कि बीजेपी के लोग आज जो विधानसभा में हंगामा कर रहे हैं, उन्हीं लोगों ने पांच साल तक सत्ता में नीतीश के साथ बैठकर शराबबंदी का समर्थन किया था. बीजेपी के लोगों को भी बताना चाहिए कि जब वे सत्ता में थे तो शराबबंदी को खत्म कराने के लिए क्या किया. बिहार के जो भी राजनीतिक दल है उन्हें पहले ये बताना चाहिए कि शराबबंदी पर उनका क्या स्टैंड है. इसके साथ ही तेजस्वी यादव को आड़े हाथ लेते हुए प्रशांत किशोर ने कहा जब तेजस्वी यादव विपक्ष में थे, तब शराबबंदी पर नीतीश सरकार को घेर रहे थे. अब ये खुद सरकार चला रहे हैं तो इन्हें शराबबंदी सही लग रहा है.

प्रशांत किशोर ने शराबबंदी कानून को 48 घंटे में वापस लेने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि अगले 48 घंटे में नीतीश कुमार को ये कानून वापस ले लेना चाहिए. पीके ने कहा कि पहले नीतीश कुमार ने पंचायत स्तर पर शराब की दुकानें स्थापित कराई. शराबबंदी लागू करने की बजाय सरकार को बीच का रास्ता निकालते हुए, एक रेगुलेटेड फ्रेमवर्क में शराब की उपलब्धता करानी चाहिए, न कि डंडे के बल पर शराबबंदी लागू करना चाहिए.

Avinash Roy

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