कुढ़नी में बीजेपी की जीत के बाद चिराग पासवान का कॉन्फिडेंस हाई, एनडीए में वापसी के साथ बढ़ेगा कद?

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बिहार की कुढ़नी विधानसभा सीट पर बीजेपी की जीत के बाद लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान का कॉन्फिडेंस हाई है। लोजपा (रामविलास) के नेता इसे चिराग पासवान की मेहनत का परिणाम बता रहे हैं। चिराग की एनडीए में वापसी जल्द होने वाली है। माना जा रहा है कि एनडीए में वापस आने के बाद चिराग का गठबंधन में कद और बढ़ सकता है। आधिकारिक तौर पर एनडीए में नहीं रहते हुए भी चिराग ने कुढ़नी में बीजेपी प्रत्याशी केदार गुप्ता के समर्थन में प्रचार किया था।

लोजपा (रामविलास) के प्रवक्ता राजेश भट्ट ने कुढ़नी उपचुनाव में बीजेपी की जीत को चिराग फैक्टर का असर बताया। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान की लोकप्रियता और पार्टी के बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट विजन में लोगों की आस्था बढ़ रही है। उपचुनाव का नतीजा इसका संकेत है। आने वाले दिनों में चिराग प्रदेश की दिशा और दशा तय करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले चुनाव में बीजेपी जब जेडीयू के साथ चुनाव लड़ी थी, तो उसे हार का सामना करना पड़ा था। इस बार चिराग पासवान साथ आए तो बीजेपी जीत गई।

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चिराग पासवान की एनडीए में वापसी?

चिराग पासवान की एनडीए में वापसी जल्द होने वाली है। वे खुद इस बात की तस्दीक कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने कहा था कि वे जल्द ही एनडीए से जुड़ेंगे। इस बारे में बीजेपी से बात चल रही है। हालांकि, गठबंधन से बाहर रहते हुए भी वे लंबे समय से बीजेपी के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। पिछले महीने हुए मोकामा और गोपालगंज सीट पर भी उन्होंने बीजेपी का प्रचार किया था।

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लोजपा का होगा विलय?

चिराग पासवान की एनडीए में वापसी का सबसे बड़ा रोड़ा उनके चाचा पशुपति पारस हैं। पारस लोक जनशक्ति पार्टी के दूसरे गुट के मुखिया हैं। लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर चाचा-भतीजा में विवाद हो गया था। इसके बाद चिराग एनडीए से अलग हो गए और पारस गठबंधन में बने रहे। वे फिलहाल मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं। हालांकि, अब दोनों के बीच बर्फ धीरे-धीरे पिघलने लगी है। मगर पशुपति पारस और चिराग पासवान, दोनों की ओर से लोजपा के विलय के बारे में खुलकर कोई बात नहीं कही गई है।

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चिराग पासवान का एनडीए में कद बढ़ेगा?

चिराग पासवान अगर एनडीए में वापसी करते हैं, तो आगामी लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में बीजेपी को फायदा हो सकता है। चिराग पासवान एक दलित युवा चेहरा हैं। एनडीए से अलग होने के बाद भी वे समय-समय पर बीजेपी के प्रति अपनी वफादारी जताने से चूकते नहीं हैं। यही कारण है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के सामने अपनी पार्टी से प्रत्याशी नहीं खड़े किए। इस साल हुए उपचुनाव में बीजेपी का प्रचार भी किया। चिराग के समर्थकों को उम्मीद है कि एनडीए में वापसी के बाद उनके नेता का गठबंधन में कद बढ़ जाएगा।

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