बिहार में सात जनवरी से शुरू होगा जातिगत जनगणना, 26 सवाल पूछेगी सरकार, इन कागजातों को रखें दुरुस्त

बिहार में जाति आधारित गणना के जनवरी से शुरू होने की तैयारियों के बीच 15 दिसंबर से सर्वे करने वालों की ट्रेनिंग शुरू हो रही है। दिसंबर के अंतिम हफ्ते में यही ट्रेनिंग फिर जिला स्तर पर होगी। 45 से 60 दिन तक इस सर्वे के चलने का अनुमान है जिससे सरकार अलग-अलग जाति समूहों की संख्या का पता लगाएगी ताकि उनकी बेहतरी के लिए सरकारी योजनाएं बनाई और बढ़ाई जा सके। खास बात ये है कि जाति आधारित गणना के सर्वे में 26 कॉलम होंगे जिन्हें सर्वेक्षण टीम लोगों से सवाल पूछकर भरेगी।

जाति आधारित गणना में सबसे खास सवाल होगा जाति प्रमाण पत्र संख्या जो सर्वेक्षण टीम लोगों से पूछेगी और सर्वे फॉर्म में दर्ज करेगी। जाति आधारित गणना का नोडल विभाग सामान्य प्रशासन विभाग है जिसके सूत्रों के मुताबिक लोग जिस जाति का खुद को बताएंगे, उन्हें इसका प्रमाण पत्र संख्या देना होगा प्रमाण के तौर पर। हालांकि ये अनिवार्य नहीं होगा। जिनके पास जाति प्रमाण पत्र नहीं होगा, उसने जाति समूह का नाम पूछकर सर्वे फॉर्म में दर्ज कर लिया जाएगा। फिर सर्वे टीम के लोग स्थानीय लोगों और पड़ोसियों से जाति के बारे में पुष्टि करेंगे।

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गाड़ी है तो वो भी दर्ज होगा, कमाई कितनी है ये भी पूछा जाएगा

सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि बिहार में बड़ी आबादी के पास जाति प्रमाण पत्र नहीं है लेकिन हमारा काम है कि जिनके पास ऐसा प्रमाण पत्र नहीं है उनके जाति के दावे की पुष्टि करें ताकि सर्वे का नतीजा सही हो।

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जाति आधारित सर्वेक्षण को नीतीश कुमार की कैबिनेट ने 2 जून को मंजूरी दी थी। बिहार सरकार ने जातियों की जो सूची बनाई है उसमें एससी, एसटी, ओबीसी, ईबीसी और सवर्णों के कुल 203 जाति समूह दर्ज हैं। सर्वे में 26 कॉलम होंगे जिनकी जानकारी सर्वे टीम लोगों से लेगी। इसमें आधार कार्ड नंबर, राशन कार्ड नंबर, परिवार के सदस्यों की संख्या, वाहन, आय जैसी सूचनाएं लेकर दर्ज की जाएंगी।

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