अब 2 मिनट में वोटर लिस्ट में नाम जोड़कर बन जाएंगे मतदाता, बिहार समेत 4 राज्यों के वोटर्स के लिए नया सॉफ्टवेयर लॉन्च

भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार सहित देश के 3 राज्यों में नया साफ्टवेयर लॉन्च कर दिया है। बिहार, उत्तराखंड और असम में बुधवार से शुरू होने जा रही इस नई व्यवस्था से मतदाता सूची में ऑनलाइन नाम जोड़ना या सुधार कराना काफी आसान हो जाएगा। गड़बड़ी की संभावना को पूरी तरह से खत्म करने वाले इस नए साफ्टवेयर को देश के सभी राज्यों में लॉन्च किया जाना है।

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास का कहना है कि अब आम लोगों के लिए घर से ऑनलाइन आवेदन और सुधार की प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। गड़बड़ी की संभावना अब नहीं के बराबर होगी, क्योंकि आवेदक को पेज सेव कर उस पर काम करने का पूरा मौका दिया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने 4 साल बाद अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव कर ERO NET का 2.0 वर्जन लॉन्च किया है।

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गोवा से हुई शुरुआत

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास का कहना है कि गोवा देश का सबसे छोटा राज्य है, इस कारण से पहले गोवा में इस नए सॉफ्टवेयर की लॉन्चिंग हुई। एक नवंबर से गोवा में शुरुआत के बाद 9 नवंबर से देश के 3 राज्यों बिहार, उत्तराखंड और असम में इसकी लॉन्चिंग की जा रही है।

दिल्ली से पहले बिहार में लॉन्चिंग का उद्देश्य बिहार की भौगोलिक स्थिति है। बिहार में लगभग 7 करोड़ मतदाता हैं, इस संख्या को देखते हुए बिहार में इसकी जरूरत महसूस हुई। भारत निर्वाचन आयोग ने इस कारण से बिहार को दिल्ली और अन्य राज्यों से पहले बिहार को चुना है। बिहार के बाद अब देश के अन्य राज्यों में इस नए सॉफ्टवेयर को लॉन्च किया जाएगा।

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4 साल पहले बनी थी ऑनलाइन की व्यवस्था

आम नागरिक जो मतदाता सूची में नाम जोड़ने या फिर सुधार के लिए आवेदन करते हैं, इसकी पूरी जानकारी एक साफ्टेवयर के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग के पास पहुंचती है। निर्वाचन आयोग इसी के आधार पर काम करता है। भारत निर्वाचन आयोग का मतदाता से जुड़ा सारा काम आयोग द्वारा तैयार किए गए साफ्टवेयर ERO NET से ही होता है। 4 साल पहले भारत निर्वाचन आयोग द्वारा पूरे भारत के लिए यह एक साफ्टवेयर 2018 में लाया गया था।

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इससे पूरे देश में नाम जोड़ने और नाम हटाने के साथ मतदाता से संबंधित पूरा काम देश के सभी राज्यों में होता था। इसमें आवेदकों को ऑनलाइन आवेदन में समस्या होती थी। एक बार कोई जानकारी अधूरी रह गई तो पूरा डेटा दोबारा देना होता था। ऐसे में आवेदन नाम के लिए हो या सुधार के लिए सभी में समस्या होती थी। नेट की समस्या या अन्य कारण से एक ही जानकारी कई बार दर्ज करनी पड़ती थी।

जानिए क्या है ERO NET का 2.0

भारत निर्वाचन आयोग का कहना है कि पुराने सॉफ्टवेयर को अब 4 साल पूरा हो गया है। टेक्नोलॉजी में भी बहुत बदलाव आया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अब बदलाव जरूरी है। ऐसे में भारत निर्वाचन आयोग ने ERO NET का नया वर्जन 2.0 लॉन्च किया है। गोवा में एक नवंबर से इसे ट्रायल के तौर पर चलाया जा रहा है। अब बिहार ,उत्तराखंड और असम में 9 नवंबर से इस नई व्यवस्था का शुभारंभ हो रहा है।

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बिहार में निर्वाचन से जुड़े कर्मियों को प्रशिक्षित कर दिया गया है। निर्वाचन कार्यालय में 3 दिनों तक दो शिफ्ट में प्रशिक्षण दिया गया है जिसमें नए साफ्टवेयर की पूरी बारीकियां बताई गई है। डेटा एंट्री ऑपरेटरों से लेकर चुनाव से जुड़े सभी कर्मियों को ट्रेंड करने के बाद ही सिस्टम लॉन्च किया जा रहा है।

अब 2 मिनट में बन जाएंगे मतदाता

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास का कहना है कि अब मतदाता बनना चुटकियों का काम है। अब सॉफ्टवेयर को लेकर कोई समस्या नहीं होगी। आम लोगों के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दो विकल्प है। ऑनलाइन के लिए 3 माध्यम है। वोटर पोर्टल, एनवीएसपी और वोटर हेल्पलाइन एप से इस नए सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया गया है। इन 3 माध्यम में से किसी से भी आम पात्र नागरिक मतदाता 2 मिनट की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

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पुरानी व्यवस्था में लास्ट स्टेज में सेव नहीं होता था। सबमिशन के पहले रुकते ही पूरी जानकारी दोबारा दर्ज करनी पड़ती थी, अब नई व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा। अब बीच में कहीं भी पेज को सेव किया जा सकता है। ऐसे में नया नाम जोड़ना और मतदाता सूची में सुधार करने की प्रक्रिया आम लोगों के लिए काफी सुविधाजनक होगी।

जानिए क्या होगा फायदा

  • यूजर इंटरफेस काफी अच्छा होने से आवेदन की प्रक्रिया आसान
  • पुराने सिस्टम की तरह हैंग या लैक करने की समस्या से छुटकारा
  • यह आवेदक के जवाब के आधार पर काम करेगा
  • हर विकल्प के लिए सिस्टम करेगा सवाल
  • आवेदक के जवाब के आधार पर खुलेगा संबंधित पेज
  • बिना सही जवाब के पेज आगे नही खुलेगा जो सुरक्षा के लिहाज से बेहतर
  • नाम और फोटो में सुधार करना अब काफी आसान होगा
  • साफ्टवेर पर स्लो नेट पर कागजात अपलोड करना आसान होगा
  • हर पेज पर रीचेक के आप्शन से गड़बड़ी की संभावना नहीं के बराबर होगी
  • किसी भी स्टेज में पेज को सेव करके बाद में सबमिट करने का ऑप्शन
  • फाइनल सबमिट करने के पहले पूरे पेज को चेक करने की व्यवस्था
  • नया नाम जोड़ने या सुधार के लिए अलग अलग पेज की व्यवस्था
  • नाम या फोटो में गड़बड़ी को सुधार की प्रक्रिया 2 मिनट में होगी पूरी

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आपकी जानकारी गलत होगी तो नहीं खुलेगा पेज

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास का कहना है कि नए साफ्टवेयर में पेज आवेदक की जानकारी के हिसाब से ही खुलेगा। अगर जानकारी सही नहीं हुई तो अगला पेज नहीं खुलेगा, ऐसा सुरक्षा को लेकर किया गया है। आवेदक के जवाब के आधार पर भी एक के बाद एक पेज खुलेगा। अगर पूरी जानकारी सही तरीके से फीड की जाएगी तभी फाइनल सबमिशन होगा। क्योंकि हर खंड में अलग अलग जानकारी मांगी जाएगी जो काफी आसानी से पूरी होती जाएगी, लेकिन इसमें गलती होने पर लास्ट में सबमिशन नहीं होगा।

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बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास का कहना है कि इस नए साफ्टवेयर की सबसे बड़ी खासियत होगी कि किसी भी स्टेज पर आप फार्म को सेव करके दोबारा फिर उस पर काम कर सकते हैं। पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी। पहले किसी भी खंड पर अगर आप जानकारी नहीं दे पाए तो शुरू से लेकर पूरी जानकारी दोबारा देनी पड़ती थी।

अब फाइनल सबमिट करने से पहले आप अपने फाइल को सेव कर कभी भी इसे पूरा कर सकते हैं। दो दिन पांच दिन जब भी आप चाहे इसे पूरा कर सकते हैं। इस नई व्यवस्था में बहुत सारे फीचर दिए गए हैं जिससे मतदाता बनना आसान होगा और सही जानकारी है तो बस 2 मिनट में फार्म पूरा हो जाएगा।

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पूरा डेटा होगा सामने, चेक करने का मौका

बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी एच आर श्रीनिवास के मुताबिक नए साफ्टवेयर में फाइनल सबमिट करने तक आप हर स्टेज क सुधार कर सककते हैं। साफ्टवेयर को ऐसा डिजाइन किया गया है कि कोई भी गड़बड़ी नहीं होने पाएगी। फाइनल प्रोसेस तक आप अपना फोटो या नाम में गड़बड़ी सही करा सकते हैं। अब ऐसा साफ्टवेयर है जिसका पेज कभी हैंग नहीं करेगा, आप मोबाइल से या लैपटाप से इसे आसानी से भर सकते हैं। नाम सुधार के लिए आपको प्रूफ देना होगा और मतदाता बनने के लिए भी उम्र के प्रमाण के साथ भारत के नागरिक होने का प्रमाण देना होगा। लास्ट स्टेज में सबमिशन से पहले यह आपकी पूरी जानकारी सही सही दर्ज होगी तो आपका आवेदन सक्सेस होगा नहीं तो साफ्टवेयर ही उसे एक्सपर्ट नहीं करेगा। ऐसे में पेंडिंग केस नहीं बढ़ेगा और जीरो एरर के साथ मतदाता क नाम जुड़ जाएगा।

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