बिहार के 45 हजार से अधिक सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक में इस साल पढ़ रहे 20 लाख से अधिक बच्चों के अभिभावकों को 20 अक्तूबर को स्कूलों में बुलाया गया है. शिक्षा विभाग ने इस दिन शिक्षकअभिभावकों की मीटिंग बुलायी है. इस तरह की मीटिंग पहली बार हो रही है. शिक्षा विभाग ने पढ़ाई की गुणवत्ता और अभिभावकों के दायित्व की समझ को बेहतर करने के लिए यह बैठक बुलायी है. सरकार के इस कदम से सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों के अभिभावकों में भी खुशी है.
शिक्षा विभाग की तरफ से जारी आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इस मीटिंग में अभिभावकों को बताया जायेगा कि उनके बच्चों के शैक्षणिक बेहतरी के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं. कक्षा एक में पढ़ रहे बच्चों के शैक्षणिक विकास के लिए परंपरागत पढ़ाई के अलावा कुछ अभिनव प्रयोग किये जा रहे हैं. अभिभावकों को इस आशय की जानकारी इसलिए दी जायेगी कि वह अपने बच्चों की सीखने की प्रवृति पर निगरानी रख सकेंगे.
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की जानकारी के मुताबिक प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कूलों के विद्यार्थियों को उनकी उम्र के हिसाब से संख्यात्मक और अंक गणितीय ज्ञान देना है, ताकि सीखने-सिखाने की प्रवृत्ति में मौजूदा खाई को पाटा जा सके. कक्षा पांच तक उम्र के हिसाब से जरूरी ज्ञान 2026-27 देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह समूची कवायद निपुण बिहार कार्यक्रम के तहत होने जा रही है.
जानकारी के मुताबिक सरकारी विद्यालयों में चल रही अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन परीक्षा को लेकर शिक्षा विभाग ने अभिभावक शिक्षक संगोष्ठी (पीटीएम) पहली बार बुलायी है. आगामी 2026-27 में प्राइमरी बच्चों को कक्षा दो तक 45 से 60 शब्द प्रति मिनट पढ़ना, कक्षा तीन में 60 शब्द प्रति मिनट पढ़ने और आगे की कक्षा में इसका अभ्यास और पढ़ाया जायेगा.
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