बिहार में IAS सेंथिल समेत चार की संपत्ति होगी जब्त, 8.76 करोड़ घोटाले का आरोप तय, ED का शिकंजा कसा

प्रवर्तन निदेशालय(ईडी ने) वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व पटना नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त के.सेंथिल कुमार सहित चार के विरुद्ध मनी लौंड्रिंग के मामले में 2.60 करोड़ की चल-अचल संपत्ति जब्त करने व पीएमएलए के तहत सजा दिलाने के लिए कोर्ट में चार्जशीट दायर किया है।

सेंथिल कुमार फिलहाल स्वास्थ्य विभाग में सचिव के पद पर तैनात हैं। इसके पहले वे गृह विभाग में सचिव थे। पटना नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त के.सेंथिल कुमार, तत्कालीन उपायुक्त वैद्यनाथ दास व अन्य पर 8.76 करोड़ रुपए के घोटाले के आरोप में विजिलेंस ब्यूरो ने मुकदमा दर्ज कर जांच कर चार्जशीट दायर किया था।

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इसी चार्जशीट के आधार पर ईडी ने वर्ष 2012 में जांच शुरू की थी। ईडी ने मनी लौंड्रिंग के केस में सेंथिल कुमार, तत्कालीन आयुक्त वैद्यनाथ दास, सेंथिल कुमार के भाई के.अयप्पन और एक ठेकेदार विमल कुमार की संपत्ति जब्त करने के लिए चार्जशीट दायर किया है।

ईडी के अनुसार जांच में यह बात सामने आई कि सेंथिल कुमार ने मुंगेर के डीएम और पटना के नगर आयुक्त रहते अकूत संपत्ति अर्जित की है। सेंथिल कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपनी अवैध संपत्ति को पटना के दो अलग-अलग फर्म मेसर्स सुधा सुपर मार्केट, मेसर्स चेन्नई कैफे के अलावा तमिलनाडु में फैमिली ट्रस्ट के.इंदिरा मेमोरियल एजुकेशन ट्रस्ट के जरिए सफेद किया।

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मेसर्स सुधा सुपर मार्केट और मेसर्स चेन्नई कैफे उनके भाई के.अयप्पन के नाम पर दिखाया गया था लेकिन वास्तव में वह सेंथिल कुमार का था। ईडी ने जांच में यह भी पाया है कि इन दोनों फर्म को विमल कुमार नाम के व्यक्ति ने काफी पैसे दिए हैं। विमल कुमार एक ठेकेदार है।

पटना निगम आयुक्त के समय का घोटाला, वर्तमान में स्वास्थ विभाग में सचिव हैं सेंथिल

विमल के जरिए खपाते थे कमाई

विमल कुमार, के.सेंथिल कुमार का बेहद करीबी है। सेंथिल कुमार अपनी अवैध कमाई को विमल के जरिए खपाते थे और उसके एवज में विमल को सरकारी ठेके दिए जाते रहे। सेंथिल कुमार ने परिवार के सदस्यों के नाम पर एक ट्रस्ट भी बनाया ताकि अवैध कमाई को सफेद किया जा सके। गुरुवार को पटना नगर निगम के पूर्व आयुक्त के सेंथिल कुमार और पूर्व अपर आयुक्त बैजनाथ दास समेत चार के खिलाफ 2 करोड़ 60 लाख 95 हजार की मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी ने पटना के विशेष प्रभारी न्यायाधीश सत्येंद्र पांडेय की अदालत में चार्जशीट दाखिल किया।

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2010 में पहली बार हुआ था केस

ईडी के अनुसार अनुसार आरोपितों ने 2 करोड़ 60 लाख 95 हजार 455 रुपयों के काले धन से अवैध संपत्तियां अर्जित की थी। पूर्व में निगरानी विभाग ने पटना नगर निगम में हुए घोटाले को लेकर वर्ष 2010 में आईपीसी तथा भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एक मुकदमा दर्ज किया था। इसके बाद ईडी ने आरोपितों की संपत्तियों की जांच की थी। ईडी ने चार साल पहले आईएएस अधिकारी के. सेंथिल कुमार व अन्य की 2.51 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त की थी।

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