अब CBI करेगी चर्चित ‘गर्भाशय कांड’ की जांच: अविवाहित युवती समेत पुरुषों का भी निकाला गया था गर्भाशय

बिहार में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बड़े पैमाने पर हुए गर्भाशय घोटाला के मामले में सीबीआई ने जांच की हरी झंडी दे दी है। गुरुवार को सीबीआई ने हाईकोर्ट में सुनवाई में जांच के लिए हामी भर दी।

एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कोर्ट से इस पूरे मामले को समझने के लिए एक हफ्ते की अपील की। इस मामले में 18 अगस्त को फाइनल फैसला दिया जाएगा। सनद रहे कि सूबे में 45 अस्पतालों और 13 डॉक्टरों ने मिल कर 46,690 महिलाओं के गर्भाशय निकाले हैं। हद तो तब हो गई जब बीमा राशि के लिए कथित रूप से 85 पुरुषों के भी गर्भाशय का आपरेशन कर दिया गया। इस घोटाले में कथित तौर पर 20-40 साल की गरीब अविवाहित महिलाओं से लेकर 40 साल से अधिक आयु की महिलाओं का गर्भाशय आपरेशन कर निकाला गया।

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CBI द्वारा जांच की सुचना मिलते के बाद से इस कांड से जुड़े आरोपियों के होश उड़ गए हैं। किसी न किसी रूप में लंबे समय से बच रहे आरोपितों पर गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है। इस गोरखधंधे में समस्तीपुर शहर सहित जिले भर के कुल 17 निजी अस्पतालों की संलिप्तता उजागर हुई। लंबी जांच चली। इसके बाद पांच अस्पतालों पर एफआईआर भी हुई।

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ऐसे हुआ था मामले का खुलासा :

2013 में तत्कालीन डीएम कुंदन कुमार ने राष्ट्रीय बीमा योजना अंतर्गत निजी नर्सिंग होम में गर्भाशय ऑपरेशन कांड में फर्जीवाड़े का खुलासा किया था। इसकी शिकायत मिलने के बाद डीएम ने पटेल मैदान में विशेष शिविर लगाकर लाभार्थियों की जांच कराई थी। इसमें अनवांटेड सर्जरी का मामला प्रकाश में आया था।

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6500 महिलाओं की सर्जरी का मामला उजागर हुआ था :

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के गोरखधंधे में शामिल जिले के 17 प्राइवेट नर्सिंग होम स्मार्ट कार्ड के तहत बीपीएल परिवार के लोगों का इलाज करता था। जिसके तहत 6500 महिलाओं के गर्भाशय सर्जरी का मामला उजागर हुआ। सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक के बयान पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

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हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने पीड़ितों को 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा देने पर सहमति जताई थी। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने स्वयं माना था कि महिलाओं/लड़कियों की बगैर सहमति के उनके गर्भाशय निकाले गए थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भी पाया कि कई महिलाओं को मातृत्व सुख से वंचित कर दिया गया।

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