समस्तीपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने बताया सरसों, राजमा, मटर और सब्जियों की बोआई का सबसे उपयुक्त समय, क्लिक कर पढ़े…

समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए वर्तमान मौसम को विभिन्न रबी फसलों और सब्जियों की बोआई के लिए अत्यंत अनुकूल बताया है. वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, किसान इस समय सरसों, राजमा, मटर, धनिया, मूली और ब्रोकली की वैज्ञानिक तरीके से खेती कर बंपर पैदावार प्राप्त कर सकते हैं. विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने फसलों की उन्नत किस्मों, बीज उपचार और खाद के उचित प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे किसानों को खेती में अधिकतम लाभ मिल सके.
सरसों और राजमा की वैज्ञानिक तरीके से करें बोआई
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सरसों की बोआई जल्द से जल्द पूरी करें. इसके लिए राजेंद्र सरसों-1, पीएम-21, नवगोल्ड और एनआरसीडीआर-2 जैसी उन्नत किस्में बेहद उपयोगी हैं. बोआई से पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम से उपचारित करना जरूरी है. इसके साथ ही राजमा की खेती के लिए उन्नत किस्में जैसे उदय पीटीआई-14 और उत्कर्ष आईपीआर 98-5 का चयन करें. प्रति हेक्टेयर तय मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट का प्रयोग करने से फसल की पैदावार में शानदार बढ़ोतरी होती है.

मटर और धनिया की खेती के लिए यह समय है सबसे उत्तम
वर्तमान मौसम में मटर की बोआई करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा. इसके लिए रचना, मालवीय मटर-15, अपर्णा और पूसा प्रभात जैसी प्रमुख किस्में अनुशंसित हैं. बीज जनित रोगों से बचाव के लिए थिरम या कार्बेन्डाजिम से बीज उपचार अवश्य करें. इसके अलावा धनिया की बोआई के लिए राजेंद्र स्वाति और पंत हरितिमा जैसी उन्नत किस्में बेहतर मानी गई हैं. बेहतर अंकुरण के लिए बोआई से पहले बीजों को हथेलियों से हल्का रगड़कर दो भागों में अलग कर लें और गोबर की खाद का उचित इस्तेमाल करें.
मूली और ब्रोकली की बंपर पैदावार के लिए खाद और बीज प्रबंधन
मूली की बोआई के लिए यह समय बहुत उपयुक्त है, जिसमें काशी हंस, पूसा चेतकी और जापानी व्हाइट जैसी किस्में शामिल हैं. जड़ों के अच्छे विकास के लिए सड़ी हुई कम्पोस्ट खाद और उर्वरकों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करें. वहीं, उत्तर बिहार में ब्रोकली की खेती के लिए पूसा केटीएस-1 और पालम समृद्धि जैसी किस्में बहुत अच्छी मानी गई हैं. पौधों की रोपाई के लिए निर्धारित दूरी का पालन करें और प्रति हेक्टेयर तय रासायनिक उर्वरक व गोबर की खाद का उपयोग करें.

कृषि विभाग और विश्वविद्यालय की किसानों से अपील
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर समय पर इन फसलों और सब्जियों की बोआई करें, तो कीटों और रोगों के प्रकोप से बचा जा सकता है. इससे न केवल लागत कम आती है, बल्कि बंपर पैदावार मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है. विश्वविद्यालय ने किसानों से अपील की है कि वे खेती से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क करें.



