समस्तीपुर के संजय की बनाई ‘आंख’ अंतरिक्ष से देखेगी धरती, ऑप्टिकल तकनीक ने तय की अंतरिक्ष की उड़ान, आठ गुणा कम वजनी मल्टीस्पेक्ट्रल स्पेस MIRA जुटाएगा धरती का डाटा

समस्तीपुर [पदमाकर सिंह लाला] : समस्तीपुर जिले के एक युवा इंजीनियर की तकनीकी प्रतिभा अब अंतरिक्ष में भारत की तस्वीरें खींचने की तैयारी कर रही है। समस्तीपुर के लिए अंतरिक्ष की दुनिया से गौरवान्वित करने वाली खबर सामने आई है। जिले के रेलवे कॉलोनी में पले-बढ़े युवा इंजीनियर संजय कुमार की नेतृत्व और सह-संस्थापक वाली हैदराबाद की डीपटेक कंपनी EoN Space Labs ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की तीन वैज्ञानिकों की टीम ने महज 502 ग्राम वजन वाले अत्याधुनिक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा MIRA को अंतरिक्ष तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है।
MIRA स्पेस टेलीस्कोप अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बन चुका है। जो अब SpaceX के Falcon-9 रॉकेट के Transporter-18 मिशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंच चुका है। MIRA को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से SpaceX के Falcon-9 रॉकेट के Transporter-18 मिशन के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया है। इसे TakeMe2Space के MOI-1A ऑर्बिटल कंप्यूटिंग सैटेलाइट के साथ इंटीग्रेट किया गया है। समस्तीपुर शहर की रेलवे कॉलोनी की गलियों से निकलकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक पहुंची यह कहानी एक ऐसे इंजीनियर की है, जिसने प्रकाश और ऑप्टिक्स की तकनीक को अपनी विशेषज्ञता बनाया और उसी के दम पर अंतरिक्ष के लिए कैमरा तैयार कर दिया।
समस्तीपुर के संजय की बनाई 'आंख' अंतरिक्ष से देखेगी धरती, ऑप्टिकल तकनीक ने तय की अंतरिक्ष की उड़ान, आठ गुणा कम वजनी मल्टीस्पेक्ट्रल स्पेस MIRA जुटाएगा धरती का डाटा#Samastipur pic.twitter.com/rdYq31zldH
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इस उपलब्धि की खास बात यह है कि MIRA के पीछे तीन भारतीय इंजीनियरों की टीम है। समस्तीपुर जिले के संजय कुमार के नेतृत्व वाली इस टीम में उज्जैन के पुनीत बदेका और दक्षिण भारत के मनोज कुमार गड्डम ने वर्ष 2022 में हैदराबाद में स्वदेशी स्पेस-इमेजिंग तकनीक विकसित करने वाली कंपनी EoN Space Labs की नींव रखी थी।समस्तीपुर के संजय कुमार कंपनी के Co-Founder & CEO है। वे फोटोनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं और ऑप्टिकल सिस्टम विशेषज्ञ के रूप में कई वर्षों तक काम कर चुके हैं।

रेलवे कॉलोनी में बीता बचपन, पिता रेलवे में थे कार्यरत :
संजय कुमार का बचपन समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में बीता। उनके पिता शिव बचन समस्तीपुर स्थित डीआरएम कार्यालय में कार्यरत थे। रेलवे के माहौल में पले-बढ़े संजय की शुरुआती शिक्षा शहर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल (सीपीएस) में हुई। वर्ष 2006 में माध्यमिक व 2008 ने उच्चत्तर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद कोटा जाकर IIT JEE की तैयारी किया। स्कूली दिनों से ही विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले संजय ने आगे चलकर ऐसी राह चुनी, जिसका सीधा संबंध अंतरिक्ष और अत्याधुनिक ऑप्टिकल तकनीक से था। उन्होंने तिरुवनंतपुरम स्थित Indian Institute of Space Science and Technology (IIST) से एवियोनिक्स में बीटेक किया। इसके बाद IIT मद्रास से फोटोनिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की। यहीं से उनके करियर की दिशा स्पष्ट होती चली गई । रॉकेट या उपग्रह बनाने के बजाय उन ऑप्टिकल सिस्टमों को विकसित करना, जिनकी मदद से अंतरिक्ष से धरती को देखा और समझा जा सके।

आंखों की इमेजिंग से अंतरिक्ष की ‘आंख’ बनाने तक :
पढ़ाई पूरी करने के बाद संजय ने एडवांस्ड ऑप्टिक्स और इमेजिंग के क्षेत्र में काम किया। L.V. Prasad Eye Institute और University of Rochester Medical Center में आठ साल से अधिक समय तक adaptive optics के क्षेत्र में काम किया। यानी उनके करियर का बड़ा हिस्सा ऐसी तकनीक विकसित करने में बीता, जिसमें प्रकाश, लेंस और इमेजिंग की बेहद सटीक इंजीनियरिंग की जरूरत होती है। इसी अनुभव को बाद में उन्होंने अंतरिक्ष तकनीक की ओर मोड़ा। यह बदलाव आसान नहीं था। अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाले कैमरों को बेहद कम वजन, छोटे आकार, कंपन और तापमान में बदलाव जैसी कठिन परिस्थितियों के बीच काम करना होता है। इसी चुनौती को संजय और उनके सहयोगियों ने अवसर के रूप में लिया।
2022 में तीन इंजीनियरों ने रखी EoN Space Labs की नींव :
समस्तीपुर के संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और दक्षिण भारत के मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर वर्ष 2022 में हैदराबाद में EoN Space Labs की नींव रखी। कंपनी का लक्ष्य ऐसे छोटे और उच्च क्षमता वाले Electro-Optical और Infrared (EO/IR) imaging systems विकसित करना था। जिनका इस्तेमाल अंतरिक्ष, ड्रोन और ग्राउंड प्लेटफॉर्म में किया जा सके। तीनों संस्थापकों की विशेषज्ञता अलग-अलग क्षेत्रों में थी। संजय ऑप्टिकल सिस्टम डिजाइन से जुड़े, पुनीत ने प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया और मनोज कुमार गड्डम ने ऑप्टिकल पेलोड इकोसिस्टम और रणनीतिक साझेदारियों में भूमिका निभाई। यही टीम आगे चलकर MIRA जैसे छोटे लेकिन अत्याधुनिक स्पेस टेलीस्कोप के विकास तक पहुंची।

502 ग्राम का MIRA बना पहचान :
EoN Space Labs की सबसे चर्चित उपलब्धियों में MIRA शामिल है। इसका वजन महज 502 ग्राम है। कंपनी के सीईओ संजय कुमार के अनुसार यह मिनिएचराइज्ड स्पेस इमेजिंग पेलोड है। जिसे छोटे आकार और कम वजन के बावजूद पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने के लिए डिजाइन किया गया है। MIRA में नौ मल्टीस्पेक्ट्रल बैंड और लगभग 9.2 मीटर ग्राउंड रिजोल्यूशन की क्षमता है।
विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की कोशिश :
समस्तीपुर के युवा इंजीनियर संजय कुमार ने अमर उजाला प्रतिनिधि पदमाकर सिंह लाला से दूरभाष पर हुई बातचीत में बताया कि भारत में सैटेलाइट, ड्रोन और निगरानी प्रणालियों के लिए अत्याधुनिक ऑप्टिकल पेलोड लंबे समय से महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्र रहे हैं। EoN Space Labs इसी क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता विकसित करने पर काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य केवल अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है। वह सैटेलाइट, ड्रोन और ग्राउंड सिस्टम के लिए EO/IR इमेजिंग पेलोड विकसित कर रही है। IIT मद्रास रिसर्च पार्क भी कंपनी को मिनिएचराइज्ड EO/IR इमेजिंग पेलोड विकसित करने वाली स्पेस एवं एयरोस्पेस कंपनी के रूप में सूचीबद्ध किया है।
अंतरिक्ष से खेत, जंगल और सीमाओं तक नजर :
बकौल संजय MIRA जैसी तकनीक से मिलने वाले मल्टीस्पेक्ट्रल डेटा का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। खेती में फसल की स्थिति और जमीन की नमी का आकलन, प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, आपदा प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें, जलवायु और पर्यावरण की निगरानी इसके संभावित उपयोग हैं। वहीं EO/IR तकनीक का इस्तेमाल निगरानी और रक्षा क्षेत्र में भी किया जा सकता है। अंतरिक्ष में सफलता के बाद अब उनकी टीम दूसरे मिशन पर काम करना शुरू कर दिया है। अब नौसेना के लिए iDEX-DIO कर रहे विकसित EoN Space Labs अंतरिक्ष के साथ ड्रोन और ग्राउंड आधारित निगरानी प्रणालियों के लिए भी ऐसे पेलोड विकसित कर रही है। कंपनी के एक स्वदेशी हैंडहेल्ड मल्टीसाइट सिस्टम को भारतीय नौसेना के लिए iDEX-DIO चुनौती के तहत विकसित किया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक इसके परीक्षण में अलग-अलग लक्ष्यों की लंबी दूरी तक पहचान की क्षमता पर काम किया जा रहा है।

पेरिस में भी समस्तीपुर के संजय की तकनीक की चर्चा :
EoN Space Labs की तकनीक अब भारत से बाहर भी प्रदर्शित हो चुकी है। IIT मद्रास द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कंपनी को Bharat Innovates – 2026 के लिए चुना गया था। जहां उसने फ्रांस के पेरिस में भारतीय डीपटेक और एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व किया। समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी से शुरू हुआ संजय कुमार का सफर अब केवल अंतरिक्ष तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। उनकी बनाई तकनीक अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की स्वदेशी ऑप्टिकल इंजीनियरिंग की क्षमता भी प्रदर्शित कर रही है।
रेलवे कॉलोनी से निकला बेटा, देश के लिए बना रहा ‘आंखें’
संजय कुमार की कहानी में सबसे खास बात यही है कि अंतरिक्ष की यह यात्रा किसी बड़े औद्योगिक घराने से नहीं, बल्कि समस्तीपुर की एक रेलवे कॉलोनी से शुरू हुई। पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद शहर के थानेश्वर स्थान मंदिर के पास अपना स्थाई निवास बनाने वाले एक रेलवे कर्मचारी के बेटे ने स्थानीय स्कूल से पढ़ाई शुरू की, अंतरिक्ष और एवियोनिक्स की पढ़ाई की, फोटोनिक्स में विशेषज्ञता हासिल की और फिर ऐसी कंपनी खड़ी की जो अब भारत के लिए अंतरिक्ष, ड्रोन और रक्षा क्षेत्र की स्वदेशी ऑप्टिकल आंखें तैयार कर रही है। 502 ग्राम वजनी MIRA अंतरिक्ष गत 1 अक्टूबर को पहुंच चुका है। इसके जरिए अंतरिक्ष से धरती की तस्वीरें और डेटा हासिल करने की दिशा में एक नया अध्याय खुला है। 10 अक्टूबर से वह काम करना शुरू कर देगा। संजय के लिए यह सिर्फ एक कैमरे का अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि समस्तीपुर की गलियों से शुरू हुई उस यात्रा का अगला पड़ाव है, जिसमें शिक्षा,शोध , विज्ञान और स्वदेशी तकनीक के सपने एक साथ जुड़े थे।

