टीबी-मुक्त भारत अभियान की बैठक में जागरूकता और स्क्रीनिंग पर दिया गया जोर, DDC ने की टीबी-मुक्त भारत अभियान की समीक्षा

समस्तीपुर : टीबी-मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन का रूप देने और जिले में टीबी उन्मूलन की गतिविधियों को प्रभावी बनाने को लेकर गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता डीडीसी सूर्य प्रताप सिंह ने की। बैठक में सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार, डॉ. विशाल समेत स्वास्थ्य विभाग और टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे। बैठक में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत जिले में टीबी की पहचान, जांच, उपचार और मरीजों को मिल रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। डीडीसी ने अधिकारियों को टीबी के संभावित मरीजों की समय पर पहचान और जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जांच में टीबी की पुष्टि होने पर मरीज का तत्काल उपचार शुरू कराया जाए। साथ ही उपचाररत मरीजों की नियमित निगरानी की जाए, ताकि वे दवा का पूरा कोर्स करें और बीच में इलाज न छोड़ें।
डीडीसी ने निक्षय पोषण योजना और निक्षय मित्र पहल को प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि टीबी मरीजों को इलाज के साथ पोषण और सामाजिक सहयोग मिलना भी जरूरी है। सक्षम लोगों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को टीबी मरीजों को गोद लेकर उपचार अवधि में सहयोग के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि टीबी के लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक करने और बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों व सामाजिक कलंक को दूर करने की जरूरत है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया जाए कि टीबी इलाज योग्य बीमारी है और समय पर जांच व नियमित उपचार से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

दो सप्ताह से अधिक खांसी हो तो कराएं जांच :
सिविल सर्जन डॉ. राजीव कुमार ने टीबी मरीजों की पहचान, जांच, उपचार और फॉलोअप की जानकारी दी। उन्होंने लोगों से अपील की कि दो सप्ताह या उससे अधिक समय से खांसी, लगातार बुखार, रात में पसीना आना, वजन कम होना, भूख में कमी या बलगम में खून आने जैसे लक्षण होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग टीबी उन्मूलन के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है। बैठक में मरीजों की जांच व उपचार, संपर्क में आए लोगों की स्क्रीनिंग, पोषण सहायता और जागरूकता कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। डीडीसी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करते हुए जिले को टीबी उन्मूलन की दिशा में अग्रणी बनाने का निर्देश दिया।




