नगर निगम में 100 करोड़ से ऊपर की योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी अनियमितता व हेराफेरी

समस्तीपुर : 47 वार्डों के समस्तीपुर शहर में नगर निगम से 100 करोड़ रूपये से ऊपर की योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी अनियमितता, भ्रष्टाचार व वित्तीय हेराफेरी करने का मामला प्रकाश में आया है। मामला दरभंगा के प्रमंडलीय आयुक्त तक जा पहुंची है। नगर निगम के उप मेयर राम बालक पासवान ने इसको लेकर दरभंगा प्रमंडल के कमिश्नर से लिखित शिकायत करते हुए विशेष निगरानी समिति से उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
उप मेयर ने कमिश्नर से शिकायत की है कि नगर निगम, समस्तीपुर में गठित सशक्त स्थायी समिति द्वारा पारित व सामान्य बोर्ड की बैठक से अनुमोदित किये जाने के बाद ही किसी भी योजना का संचालन किया जाना है। पर, न निगम स्थायी समिति की बैठक बुलाई जा रही है, और न सामान्य बोर्ड की बैठक बुलाई जा रही है तथा चुपके-चुपके संबंधित आयुक्त व मेयर के द्वारा 4 करोड़ 45 लाख रुपये की पुस्तकालय योजना को अवैध तरीके से भुगतान कर दिया गया है। यह भुगतान सीधा गबन की श्रेणी में आता है। अतः इसकी विशेष निगरानी समिति से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।


कहा गया है कि निगम क्षेत्र अन्तर्गत धर्मपुर से लेकर गरूआरा नहर तक, पंचवटी चौक से लेकर मोहनपुर जमुआरी तक औऱ तत्काल कार्य चल रहे सोनवर्षा चौक से लेकर पंचवटी चौक तक के ड्रेनेज निर्माण कार्य में प्राक्कलन का अनुपालन नहीं किया जा रहा है।निर्माण एजेंसी बुडको के द्वारा प्राक्कलन का उल्लंघन करने के आलोक में निदेशक, बुड़को को तत्कालीन नगर आयुक्त केडी प्रोज्जवल से शिकायत भी की गई थी। फिर भी, अनियमितता एवं मनमाने तरीके से निर्माण कार्य चलता रहा तथा निर्माण की प्राक्कलित राशि का बंदरबांट होता रहा है। इसकी लागत राशि 100 करोड़ रुपये बताई गई है।

उन्होंने कहा है कि आश्चर्यजनक पहलू यह है, कि इन क्रियान्वित योजनाएं निर्माण के साथ ही दम तोड़ने लगी हैं। ऐसे में निर्माण एजेंसी का भुगतान रोकी जाए। साथ ही, प्राक्कलन के मुताबिक कार्य की गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच तकनीकी समिति से करायी जाए। इसके अलावा विभागीय योजनाओं से संबंधित कार्यों की जांच कराने की भी मांग की गई है। कमिश्नर से कहा गया है कि सैकड़ों करोड़ की विभागीय योजनाएं चलाई गई हैं, जिसमें विभाग के कनीय अभियंताओं की प्रत्यक्ष भागीदारी रही है, अर्थात् योजनाओं का संचालन उन्हीं के द्वारा हुआ है।
संचालित योजनाओं की उच्चस्तरीय तकनीकि समिति से जांच कराने पर पता चलेगा कि योजनाएं पूर्ण हो गई हैं तथा इन योजनाओं की राशि का भुगतान भी पूर्ण हो गया है, लेकिन योजनाएं धरातल पर शुन्य हैं। इस प्रकार से योजना राशि की लूट व्याप्त है। कमिश्नर से सभी प्रकार की योजनाओं के भुगतान पर पूर्णतः रोक लगाकर और इसकी भी तकनीकि समिति गठित कर जांच कराने को कहा गया है।

उप मेयर ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि आधी-अधूरी योजनाओं को भी पूर्ण दिखाकर कार्य पूरा दिखा कर भुगतान उठा लिया गया है। साथ ही निर्माण संचिका को फर्जी कागजातों से पूर्ण बता दिया गया है। शिकायत पत्र के अनुसार लगभग 3 करोड़ 60 लाख रुपये का साईनेज बोर्ड लगाने की योजना की स्वीकृति दी गई थी। शहर के वार्डो में साईनेज बोर्ड लगाकर भुगतान करने की बातें उठीं तो उप मेयर ने एजेंसी के कार्य से संतुष्ट नहीं होने की बात बताकर भुगतान पर रोक लगाने के लिए पत्र दिया दिया था, तो भुगतान तो रोक दिया गया लेकिन पुनः भुगतान करने के लिए लोग लगे हुए हैं। जिस राशि में भी भारी लेनदेन की संभावना व्याप्त बताई गई है।
शहर में स्ट्रीट लाईट लगाने के नाम पर सैकडों लाईट लगाने का आदेश कर करोड़ों में भुगतान किया गया है। इसके क्रियान्वयन में संबंधित नगर आयुक्त व मेयर पर आरोप लगाया गया है। उप मेयर द्वारा आरोप लगाया गया है कि घटिया स्तर का सामान लगाकर एजेंसी तथा संबंधित नगर आयुक्त व महापौर करोड़ों का बारा-न्यारा करने में लगे हुए हैं। अतः इस आलोक में भी सैकड़ों लाइट की जगह दर्जनों में दिखाई पड़ती हैं, जो जांच का विषय है। उप मेयर द्वारा शिकायत पत्र में शहर में साफ-सफाई की स्थिति बद से बदतर बताई गई है।

उनका कहना है कि उनके द्वारा शिकायत के बावजूद भी एजेंसी के विरूद्ध निगम प्रशासन शिथिल एवं निष्क्रिय बना है। इस बारे में भी उप मेयर द्वारा पत्र डीएम को भी दिया था, परन्तु उन्होंने सम्पूर्ण तथ्यों की जांच के लिए नगर आयुक्त को ही रेफर कर दिया। तीन-चार महीनों से भी अधिक समय बीत जाने पर भी कार्रवाई शून्य है। इस हालत में मजबूरन, निराश एवं हताश होकर उनके (उप मेयर) द्वारा प्रमंडलीय कमिश्नर व नगर विकास विभाग के आला अधिकारियों से मनमाना एवं लूट की कारगुजारी पर रोक लगाने के साथ ही समुचित कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र देना पड़ा है।

