‘मिशन निर्भया’ में साइबर मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, नेपाली नाबालिग रेस्क्यू, तीन गिरफ्तार
सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए नेपाल की एक 16 वर्षीय नाबालिग को बहला-फुसलाकर मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। “मिशन निर्भया” के तहत चलाए गए संयुक्त अभियान में नाबालिग को गुजरात से सकुशल मुक्त कराया गया, जबकि गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। जानकारी के अनुसार, 5 जून को क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी, मंगलदोई (असम) को सूचना मिली थी कि नेपाल की एक नाबालिग 24 अप्रैल से लापता है।
इसके बाद इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा के नेतृत्व में मानव स्रोतों, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए जांच शुरू की गई। जांच में पता चला कि गिरोह इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, वीचैट, टिकटॉक तथा ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से किशोरियों को प्रेम, नौकरी, मॉडलिंग और बेहतर जीवन का झांसा देकर अपने जाल में फंसाता था।
जांच के दौरान पता चला कि पीड़िता को गुजरात में बंधक बनाकर रखा गया है। बाद में रक्सौल क्षेत्र से मिले इनपुट के आधार पर संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखी गई और नेपाल पुलिस के साथ खुफिया जानकारी साझा की गई। नेपाल पुलिस ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
इसके बाद एसएसबी, गुजरात पुलिस, मिशन मुक्ति फाउंडेशन, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और अन्य एजेंसियों के समन्वय से 3 जुलाई को विशेष अभियान चलाकर नाबालिग को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। फिलहाल पीड़िता को नेपाल भेजने की प्रक्रिया जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कई अन्य लड़कियों को भी निशाना बना चुका हो सकता है। सुरक्षा विशेषज्ञों ने अभिभावकों से बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध संपर्क की तत्काल सूचना पुलिस को देने की अपील की है।

