महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले में समस्तीपुर के बिजेंद्र गुप्ता की तलाश तेज, पत्नी हुई गिरफ्तार; पिता बोले- 5 साल से नहीं आया घर

समस्तीपुर : समस्तीपुर जिले के विद्यापतिनगर थाना क्षेत्र के मऊ शेरपुर गांव निवासी बिजेंद्र गुप्ता एक बार फिर चर्चा में है। महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच के दौरान उसका नाम सामने आने के बाद महाराष्ट्र पुलिस उसकी तलाश में लगातार कई राज्यों में छापेमारी कर रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में बिजेंद्र का नाम नेटवर्क के प्रमुख संचालकों में लिया गया है। हालांकि इस दावे की जांच अभी जारी है और इसकी पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। महाराष्ट्र पुलिस इस मामले में अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।
पूछताछ के आधार पर बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा में बिजेंद्र के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। इसी क्रम में पटना से उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार किया गया है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी पेपर लीक मामले में बिजेंद्र गुप्ता का नाम सामने आया हो। इससे पहले बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा, बिहार टीईटी, बिहार पुलिस भर्ती, ओडिशा एसएससी, उत्तर प्रदेश एसएससी तथा नीट यूजी समेत कई चर्चित परीक्षा घोटालों की जांच में भी उसका नाम सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में ओडिशा एसएससी पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और फिलहाल वह उस मामले में जमानत पर है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वह कथित रूप से विभिन्न राज्यों में सक्रिय नेटवर्क से जुड़ा रहा है। जांच एजेंसियां उसके पुराने मामलों और वर्तमान नेटवर्क के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। दूसरी ओर, उसके पैतृक गांव मऊ शेरपुर में रहने वाले 85 वर्षीय पिता बालेश्वर साह ने बताया कि बिजेंद्र पिछले करीब पांच वर्षों से गांव नहीं आया है। मां के निधन पर वह अंतिम बार गांव पहुंचा था। पिता का कहना है कि अंतर्जातीय विवाह के बाद उसने परिवार से दूरी बना ली थी। मैट्रिक के बाद वह पढ़ाई के लिए बेगूसराय चला गया और उसके बाद उसकी गतिविधियों की उन्हें कोई जानकारी नहीं रही।

पिता बालेश्वर साह ने बताया कि कुछ वर्ष पहले ओडिशा पुलिस उसकी तलाश में गांव पहुंची थी, और उनसे पूछताछ की थी। लेकिन महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले में अब तक किसी जांच एजेंसी ने उनसे पूछताछ नहीं की है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से ही अपनी बहू की गिरफ्तारी की जानकारी मिली है। परिजनों के अनुसार बिजेंद्र बचपन से पढ़ाई में काफी तेज था। वर्ष 2003 में आगे की पढ़ाई के लिए वह बेगूसराय गया, जहां बाद में कोचिंग पढ़ाने लगा। परिवार का दावा है कि इसी दौरान उसका नाम एक हत्या के मामले में सामने आया और वह जेल भी गया।

पिता का कहना है कि जेल के दौरान उसकी पहचान चर्चित सॉल्वर गैंग के सरगना रंजीत डॉन और अन्य लोगों से हुई, जिसके बाद वह कथित तौर पर इस नेटवर्क से जुड़ गया। वहीं, गांव में उसके तीनों बड़े भाई आज भी सामान्य जीवन जी रहे हैं। बड़े भाई बमबम साह मऊ बाजार में आटा चक्की और सरसों तेल पेराई का काम करते हैं। दूसरे भाई रामू साह किराना दुकान चलाते हैं, जबकि तीसरे भाई जितेंद्र साह भी आटा चक्की और तेल पेराई का व्यवसाय करते हैं। परिवार का कहना है कि वर्षों से बिजेंद्र का उनसे नियमित संपर्क नहीं है।
उधर, बिजेंद्र की भाभी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका नाम जानबूझकर हर पेपर लीक मामले में उछाला जा रहा है। उनके अनुसार बिजेंद्र निर्दोष है और जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी। फिलहाल महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक मामले की जांच तेज है और विशेष जांच दल पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटा हुआ है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।


