नौकरी के बहाने मानवाधिकार आयोग के सदस्य विकास सिंह ने की रेकी, फिर ऐसे किया पुरे गिरोह का भंडाफोड़

समस्तीपुर : युवाओं को बंधक बनाकर चेन मार्केटिंग और ठगी के धंधे का पर्दाफाश किसी संयोग से नहीं, बल्कि सुनियोजित रेकी और खुफिया पड़ताल के बाद हुआ। जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से जुड़े सदस्य विकास सिंह ने खुद नौकरी के इच्छुक युवक बनकर गिरोह के ठिकानों तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई, जिसके बाद बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बताया गया है कि विकास सिंह दो दिन पहले नौकरी की तलाश करने वाले युवक के रूप में समस्तीपुर पहुंचे थे।

इस दौरान उन्होंने कालिका कॉम्प्लेक्स, मुसापुर, धरमपुर समेत अन्य ठिकानों का दौरा किया और नौकरी देने का दावा करने वाले कंपनी के संचालकों एवं सरगना से मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्हें भी नौकरी और बेहतर आय का झांसा दिया गया तथा प्रक्रिया पूरी करने के लिए 25 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। विकास सिंह ने चालाकी से आरोपियों को भरोसे में लिया और कहा कि वह अपने बड़े भाई से पैसे मंगवाकर जल्द जमा कर देंगे। इसके बाद वह वहां से बाहर निकल आए।

इस दौरान उन्होंने परिसर में रह रहे युवक-युवतियों की संख्या, उनकी गतिविधियों और पूरे सिस्टम को करीब से देखा। उन्हें अंदेशा हुआ कि यहां बड़ी संख्या में युवाओं को संदिग्ध परिस्थितियों में रखा गया है। रेकी के बाद विकास सिंह ने पूरी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न भवनों और छात्रावासों में सैकड़ों युवक-युवतियां रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में युवतियां और नाबालिग भी शामिल हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया गया।इसके बाद बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह तक संयुक्त रूप से कई स्थानों पर छापेमारी की गई और 105 युवक-युवतियों एवं नाबालिगों को मुक्त कराया गया। फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह के नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। इस कार्रवाई को बिहार भर में अब तक के सबसे बड़े रेस्क्यू और रोजगार ठगी विरोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है।




