बिहार में लाखों घरों तक पहुंचेगा PNG, मुख्य सचिव ने प्रोजेक्ट्स को लेकर दिए ये सख्त निर्देश

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राज्य के विकास की गति को तेज करने के लिए सभी विभागों को एक नया ‘रोडमैप’ तैयार करने का निर्देश दिया है। सोमवार को राज्य पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना 2026-27 की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सभी विभाग अपने लिए पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करें और उसी के अनुरूप अपनी परियोजनाओं का प्रस्ताव तैयार करें। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि विभाग अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट रखेंगे, तभी राज्य को केंद्र सरकार से मिलने वाली विशेष सहायता का अधिकतम लाभ मिल सकेगा।
2 लाख करोड़ के फंड पर बिहार की नजर
बैठक के दौरान वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव ने योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2026-27 के लिए सभी राज्यों को कुल ₹2 लाख करोड़ का आवंटन किया है। बिहार इस विशाल फंड का बड़ा हिस्सा प्राप्त करने की तैयारी में है। मुख्य सचिव ने इस विशेष फंड के पारदर्शी और सटीक उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि सभी विभागों को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनिवार्य शर्तों, विशेषकर ब्रांडिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का हर हाल में पालन करना होगा। इसके साथ ही, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए यह निर्देश दिया गया है कि 31 मार्च 2026 तक खर्च की गई राशि का समेकित उपयोगिता प्रमाण पत्र (UC) समय सीमा के भीतर जमा कराया जाए। मुख्य सचिव ने सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) के बैंक खातों में जमा ब्याज की राशि को भी जल्द से जल्द भारत की संचित निधि में वापस जमा करने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया है।

1.04 लाख घरों में पहुंचेगी पीएनजी सेवा
बैठक में बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के 1.04 लाख से अधिक घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेवा शुरू की जाए। यह कदम न केवल रसोई गैस की उपलब्धता को आसान बनाएगा, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में भी बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। योजनाओं की सुस्त चाल को रोकने के लिए निगरानी का सख्त ढांचा तैयार किया गया है। वित्त विभाग के विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल की अध्यक्षता में नियमित समीक्षा बैठकें होंगी। वहीं, अपर मुख्य सचिव स्वयं हर 15 दिन पर उच्च स्तरीय प्रगति की समीक्षा करेंगे, ताकि फाइलों में अटकी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जा सके।




